प्रकाश मेहरा: संघर्ष से सफलता तक का सफर, जानें हिंदी सिनेमा के इस दिग्गज की कहानी
प्रकाश मेहरा का अद्वितीय सफर
मुंबई, 12 जुलाई। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल उनकी फिल्मों से नहीं, बल्कि उनके संघर्षों से भी होती है। ऐसे ही एक नाम हैं प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक प्रकाश मेहरा। आज उन्हें बॉलीवुड के सबसे सफल फिल्मकारों में से एक माना जाता है, लेकिन उनकी यात्रा बेहद कठिनाइयों से भरी रही। वह केवल 13 रुपये लेकर मुंबई आए थे। मायानगरी में अपनी पहचान बनाने के लिए उन्होंने कई छोटे-मोटे काम किए, नाई की दुकान पर भी काम किया और अनेक चुनौतियों का सामना किया। उनकी मेहनत और दृढ़ संकल्प ने उन्हें हिंदी सिनेमा का एक बड़ा नाम बना दिया।
प्रकाश मेहरा का जन्म 13 जुलाई 1939 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर में हुआ। उन्हें बचपन से ही संगीत और फिल्मों में गहरी रुचि थी। उनके जीवन की शुरुआत आसान नहीं थी, क्योंकि उनकी मां का निधन बचपन में ही हो गया था और पिता ने गृहस्थ जीवन से दूरी बना ली थी। ऐसे में उनका पालन-पोषण रिश्तेदारों के बीच हुआ। फिल्मों के प्रति अपने लगाव के चलते उन्होंने छोटी उम्र में ही मुंबई आने का निर्णय लिया।
कहा जाता है कि किशोरावस्था में प्रकाश मेहरा अपने सपनों को साकार करने के लिए घर से निकल पड़े। उनके पास केवल 13 रुपये थे। उस समय मुंबई पहुंचना और फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाना आसान नहीं था। शुरुआती दिनों में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। काम की तलाश में भटकते हुए उन्होंने गुजारे के लिए छोटे-मोटे काम किए, यहां तक कि नाई की दुकान पर भी काम किया, लेकिन उनके मन में हमेशा फिल्म बनाने का सपना जीवित रहा।
संघर्ष के दौरान उनकी मुलाकात फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कुछ लोगों से हुई, जिससे उन्हें धीरे-धीरे फिल्मों में काम मिलने लगा। उन्होंने शुरुआत में प्रोडक्शन कंट्रोलर के रूप में काम किया और बाद में सहायक निर्देशक के तौर पर भी कार्य किया। फिल्मी दुनिया को करीब से समझने के बाद उन्होंने निर्देशन की ओर कदम बढ़ाया।
1968 में प्रकाश मेहरा ने बतौर निर्देशक फिल्म 'हसीना मान जाएगी' से अपने करियर की शुरुआत की। यह फिल्म सफल रही और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने 'मेला', 'समाधि' और 'आन-बान' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया, जिन्हें दर्शकों ने सराहा। उनके करियर की सबसे बड़ी फिल्म 'जंजीर' थी, जो 1973 में रिलीज हुई और इसने हिंदी सिनेमा का इतिहास बदल दिया।
उस समय अमिताभ बच्चन की कई फिल्में सफल नहीं हो रही थीं और उन्हें फ्लॉप अभिनेता माना जाने लगा था। लेकिन प्रकाश मेहरा ने उन पर विश्वास जताया और उन्हें 'जंजीर' में मौका दिया। इस फिल्म की सफलता ने अमिताभ बच्चन को रातोंरात बड़ा स्टार बना दिया और उनकी पहचान 'एंग्री यंग मैन' के रूप में स्थापित हुई।
'जंजीर' के बाद प्रकाश मेहरा और अमिताभ बच्चन की जोड़ी ने कई यादगार फिल्में दीं, जिनमें 'हेरा फेरी', 'खून पसीना', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'लावारिस', 'नमक हलाल' और 'शराबी' जैसी सुपरहिट फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों ने दोनों को हिंदी सिनेमा में विशेष स्थान दिलाया।
प्रकाश मेहरा केवल निर्देशन तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने कई फिल्मों का निर्माण भी किया। उन्होंने 'दलाल', 'जिंदगी एक जुआ' और 'बाल ब्रह्मचारी' जैसी फिल्मों का निर्माण किया। साल 2006 में उन्हें इंडिया मोशन पिक्चर डायरेक्टर्स एसोसिएशन द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, उन्हें निर्माता के रूप में भी लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान मिला।
प्रकाश मेहरा का निधन 17 मई 2009 को मुंबई में हुआ, जब वह 69 वर्ष के थे। बीमारी के कारण उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी बनाई फिल्में आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं।
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