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दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव: क्या है इस बार खास?

दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में विभिन्न भाषाओं की फिल्मों का प्रदर्शन हो रहा है। इस महोत्सव में कई प्रमुख कलाकारों ने भाग लिया, जिनमें रितुपर्णा सेनगुप्ता और दिव्या दत्ता शामिल हैं। रितुपर्णा ने अपनी फिल्म के बारे में गर्व से बात की, जबकि दिव्या ने दिल्ली में इस तरह के महोत्सव के महत्व पर जोर दिया। शेखर कपूर ने एआई के उपयोग पर चर्चा की, और संग्राम सिंह ने सिनेमा के सामाजिक जुड़ाव पर अपने विचार साझा किए। जानें इस महोत्सव में और क्या खास है।
 
दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव: क्या है इस बार खास?

दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन


नई दिल्ली, 29 मार्च। भारत मंडपम में चल रहे 'अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव' में विभिन्न भाषाओं की फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है।


इस समारोह में हर क्षेत्रीय भाषा के कलाकारों को सिनेमा के विभिन्न व्यक्तियों से मिलने का अवसर मिल रहा है। महोत्सव के पांचवे दिन, बंगाली अभिनेत्री रितुपर्णा सेनगुप्ता, दिव्या दत्ता, तेलुगू सिनेमा के के.के. सेंथिल कुमार, संयुक्ता मेनन और संग्राम सिंह को देखा गया।


अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में अपनी फिल्म की स्क्रीनिंग से रितुपर्णा सेनगुप्ता बेहद खुश हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, "यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मेरी फिल्म यहां प्रदर्शित हो रही है। मैं कई वर्षों से बंगाली सिनेमा में सक्रिय हूं और कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।"


फिल्म के विषय में बात करते हुए, उन्होंने बताया कि यह मां और बेटी के रिश्ते को दर्शाती है, जिसमें उनकी मां का किरदार प्रसिद्ध अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने निभाया है। उनके साथ स्क्रीन पर होना उनके लिए एक सपने के समान है।


इस समारोह में उपस्थित डायरेक्टर शेखर कपूर ने एआई के विषय में अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि नई तकनीक के आने से अब 300 करोड़ की फिल्म को 300 रुपए में भी बनाया जा सकता है, और एक बच्चा भी एआई की मदद से बेहतरीन वीडियो बना सकता है।


दिव्या दत्ता ने मीडिया से कहा, "दिल्ली में इस स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन होना बहुत खास है। पहले हमें फिल्मों की स्क्रीनिंग के लिए मुंबई जाना पड़ता था, लेकिन अब दिल्ली की सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।"


अपनी फिल्म 'चिरैया' का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा, "आज के दर्शक बदल चुके हैं और उन्हें अच्छी संदेश देने वाली कहानियां चाहिए। मुझे लगता था कि 'चिरैया' अच्छी फिल्म है, लेकिन इसे इतना प्यार मिलेगा, यह मैंने नहीं सोचा था।"


तेलुगू सिनेमा से जुड़े केके सेंथिल कुमार ने कहा कि दिल्ली में इस तरह के बड़े अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन होना एक बड़ी बात है। एक ही मंच पर डायरेक्टर, अभिनेता और निर्माताओं का होना बहुत महत्वपूर्ण है। यहां छोटे और नए फिल्म निर्माताओं को एक नया मंच मिला है।


पहलवान संग्राम सिंह ने भी इस महोत्सव में भाग लिया। उन्होंने कहा कि चाहे बात खेल की हो या सामाजिक जीवन की, सिनेमा हर किसी से जुड़ा है। समारोह में कल्ट फिल्मों से लेकर नई फिल्मों की प्रदर्शनी लगी है। मुझे उम्मीद है कि अगले साल हम भी अपनी फिल्म के साथ यहां आएंगे।


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