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दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' पर विवाद: गुरुद्वारों में होगी स्क्रीनिंग!

दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद, इसे चार गुरुद्वारों में प्रदर्शित करने का निर्णय लिया गया है। जिला गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के ट्रेजरर सरदार जगपाल सिंह ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने फिल्म के हटाए जाने को लोकतंत्र पर कलंक बताया। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और फिल्म की वास्तविकता को लेकर उठाए गए सवाल।
 

फिल्म 'सतलुज' का विवाद


श्रीनगर, 10 जुलाई। अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की नई फिल्म 'सतलुज' इन दिनों विवादों के घेरे में है। इस संदर्भ में जिला गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (डीजीपीसी) के ट्रेजरर, सरदार जगपाल सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद इसे चार गुरुद्वारों में प्रदर्शित किया जाएगा।


उन्होंने कहा कि पहले चरण में यह फिल्म चार अलग-अलग गुरुद्वारों में दिखाई जाएगी। शुक्रवार को गुरु नानक नगर के गुरुद्वारे में, शनिवार को अखनूर के गुरुद्वारे में, रविवार को खोर ब्रायस पुरा में और 14 जून को तलाब टिल्लो में इसका प्रदर्शन होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समिति का सहयोग मिलता है, तो फिल्म अन्य गुरुद्वारों में भी दिखाई जाएगी।


सरदार जगपाल सिंह ने कहा कि फिल्म को केवल 48 घंटे के भीतर ओटीटी से हटाना लोकतंत्र पर एक कलंक है। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म में वास्तविकता को दर्शाया गया है और यह उन सभी के लिए शर्म की बात है जिन्होंने इसे हटाने में भूमिका निभाई।


उन्होंने कहा, "भारत एक विविधता से भरा देश है। ऐसे में ओटीटी से फिल्म को हटाने में शामिल लोगों के लिए यह बहुत शर्मनाक है।" उन्होंने सवाल उठाया कि यदि फिल्म में कोई वास्तविकता नहीं थी, तो सीबीआई ने इसकी जांच क्यों नहीं की? यदि मामला अदालत में गया, तो सजा क्यों नहीं दी गई?


उन्होंने कहा कि यह समझना मुश्किल है कि फिल्म को ओटीटी से क्यों हटाया गया, जबकि इसमें सच्चाई को दर्शाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सच को लोगों तक पहुँचने से रोकना एक पाप है।


दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' हाल ही में बिना किसी प्रमोशन के ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज हुई थी, लेकिन इसे जारी होने के महज 48 घंटे के भीतर ही बैन कर दिया गया।


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