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क्या है फिल्म 'लालो- कृष्ण सदा सहायते' का रहस्य? जानें मेकर्स की जुबानी

फिल्म 'लालो- कृष्ण सदा सहायते' की सफलता के पीछे की कहानी और भगवान कृष्ण का आध्यात्मिक संदेश जानें। निर्देशक अंकित साखिया और अभिनेता श्रुहद गोस्वामी ने शेखर सुमन के शो में इस फिल्म के अनुभव साझा किए। जानें कि कैसे भगवान कृष्ण ने लालो की मदद की और उसकी पत्नी तुलसी के विश्वास ने कैसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
 

फिल्म की सफलता और आध्यात्मिक संदेश




मुंबई, 14 जुलाई। अभिनेता श्रुहद गोस्वामी, निर्देशक अंकित साखिया और निर्माता जय व्यास ने शेखर सुमन के चैट शो 'शेखर टुनाइट' में अपनी फिल्म 'लालो- कृष्ण सदा सहायते' की सफलता, निर्माण के अनुभव और इसके आध्यात्मिक संदेश पर चर्चा की।


जब शेखर ने पूछा कि फिल्म में भगवान कृष्ण केवल लालो के पास ही क्यों आते हैं, जबकि अन्य पात्र भी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो निर्देशक अंकित ने उत्तर दिया।


उन्होंने कहा, ''लालो का किरदार उसकी मासूमियत के कारण खास है। वह गलत संगत में पड़ गया था और गलत निर्णयों में फंस गया था। लेकिन उसकी पत्नी तुलसी को पूरा विश्वास था कि उसका लालो एक दिन सही रास्ते पर लौटेगा।''


अंकित ने आगे बताया, ''लालो एक फार्म हाउस में चोरी करने जाता है और वहां मुश्किल में फंस जाता है। ऐसे समय में भगवान कृष्ण उसकी मदद के लिए आते हैं, लेकिन वे उसे वहां से निकालने के बजाय सही मार्ग दिखाते हैं और समझाते हैं कि उसे अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी।''


निर्देशक ने कहा, ''भगवान कृष्ण लालो के पास इसलिए आते हैं क्योंकि उसकी पत्नी तुलसी की श्रद्धा और विश्वास बहुत मजबूत था। वह जानती थी कि उसका पति सही रास्ते पर लौटेगा। कृष्ण उसे सिर्फ बचाते नहीं हैं, बल्कि उसे यह भी समझाते हैं कि उसे अपनी जिंदगी खुद बदलनी होगी। इसके बाद लालो खुद उस कठिनाई से बाहर निकलता है। उसकी सोच साफ थी और उसके अंदर अच्छाई थी, इसलिए भगवान कृष्ण उसके पास आए।''


अभिनेता श्रुहद गोस्वामी ने फिल्म की सफलता के बाद एक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि जब फिल्म ने 100 करोड़ रुपए की कमाई का आंकड़ा पार किया, तब भी पूरी टीम दर्शकों का धन्यवाद करने के लिए उनसे मिल रही थी।


श्रुहद ने कहा, ''फिल्म ने 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया था, लेकिन हम फिर भी दर्शकों से मिलकर उनका धन्यवाद कर रहे थे। इस दौरान एक व्यक्ति ने कहा कि कृष्ण हमें कब दर्शन देते हैं, यह सिर्फ मंदिर जाने या भोग लगाने से तय नहीं होता। जब आप ईमानदारी से काम करते हैं, तब भगवान आपके साथ होते हैं।''


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