क्या है 'देव डी' के पीछे की दिलचस्प कहानी? अभय देओल ने साझा किया खास किस्सा!
फिल्म 'देव डी' की री-रिलीज और अभय देओल का अनुभव
मुंबई, 23 अप्रैल। कभी-कभी फिल्मों के कुछ दृश्यों के पीछे कलाकारों और निर्देशकों की सोच और रचनात्मकता की एक लंबी कहानी होती है। ऐसी ही एक दिलचस्प कहानी फिल्म 'देव डी' से जुड़ी है, जो भारतीय सिनेमा की अनोखी फिल्मों में से एक मानी जाती है। यह फिल्म 24 अप्रैल को फिर से सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने जा रही है, और इस अवसर पर अभिनेता अभय देओल ने फिल्म से जुड़ा एक मजेदार किस्सा साझा किया है। यह किस्सा निर्देशक अनुराग कश्यप के साथ उनकी रचनात्मक बातचीत से संबंधित है।
अभय देओल ने इंस्टाग्राम पर फिल्म का एक दृश्य साझा करते हुए कहा, ''यह मेरे लिए केवल एक दृश्य नहीं था, बल्कि एक ऐसा क्षण था जिसमें अभिनय और निर्देशन के बीच एक अनोखी सोच का मेल हुआ था। इस दृश्य में मेरा किरदार देव रात के समय चंदा के कमरे के बाहर इंतजार करता है। चंदा का किरदार अभिनेत्री कल्कि कोचलिन निभा रही हैं, जो दिन में पढ़ाई करती हैं और रात में एक कठिन जीवन जीती हैं।''
दृश्य में दिखाया गया है कि देव बाहर इंतजार कर रहा है और अंदर से उसे कुछ आवाजें सुनाई देती हैं। लेकिन जब वह कमरे के अंदर जाता है, तो उसे पता चलता है कि उसके विचारों के विपरीत कुछ भी नहीं है। चंदा अकेली होती है और एक फोन कॉल पर अपने भावनाओं को व्यक्त कर रही होती है।
अभय देओल ने बताया कि इस दृश्य की शुरुआत एक अलग सोच से हुई थी। अनुराग कश्यप ने उनसे कहा था कि वह बाहर बैठकर इंतजार करें और ऐसा माहौल तैयार किया जाए कि दर्शकों को लगे कि अंदर कुछ हो रहा है। अभय ने इस विचार को अपने तरीके से समझा और उसमें थोड़ा अलग दृष्टिकोण जोड़ दिया।
अभय ने मजाक में कहा कि चूंकि चंदा कई भाषाएं जानती है, जैसे हिंदी, अंग्रेजी और तमिल, तो हो सकता है कि वह फोन पर किसी ऐसे व्यक्ति से बात कर रही हो, जो विभिन्न भाषाओं और अंदाज में बात करने का शौकीन हो। इस विचार से कहानी और भी दिलचस्प बन सकती है, क्योंकि दर्शक भी देव के साथ इस भ्रम में रहेंगे कि अंदर वास्तव में क्या हो रहा है।
यह विचार अनुराग कश्यप को बहुत पसंद आया। अभय ने कहा, ''जब अभिनेता और निर्देशक के बीच इस तरह की खुली बातचीत होती है, तो किसी भी दृश्य की गहराई और प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि 'देव.डी' जैसी फिल्में आज भी अलग मानी जाती हैं।''
'देव डी' फिल्म प्रसिद्ध लेखक शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के 1917 के उपन्यास देवदास का आधुनिक रूपांतरण है। इसे आज के समय और सोच के अनुसार पंजाब और दिल्ली की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत किया गया है। फिल्म की कहानी देवेंद्र सिंह 'देव' ढिल्लन नामक एक अमीर लेकिन भावनात्मक रूप से टूटे युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने बचपन के प्यार पारो से अलग होने के बाद शराब और नशे की दुनिया में चला जाता है। इसी बीच उसकी जिंदगी में चंदा आती है, जो खुद भी अपने दर्द और अतीत से जूझ रही होती है। दोनों की यह मुलाकात कहानी को एक नई दिशा देती है।
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