क्या है ताइवान के राजदूत की ‘धुरंधर’ पर राय? जानें इस फिल्म की खासियत!
ताइवान के प्रतिनिधि ने की ‘धुरंधर’ की सराहना
रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ को अब ताइवान के राजदूत मुमिन चेन ने भी सराहा है। दिल्ली में आयोजित ताइवान फिल्म फेस्टिवल के दौरान, चेन ने इस फिल्म के बारे में अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष उन्होंने जितनी भारतीय फिल्में देखीं, उनमें ‘धुरंधर’ सबसे प्रभावशाली लगी। इसके साथ ही, उन्होंने बॉलीवुड के मशहूर सितारों आमिर खान और शाहरुख खान की भी प्रशंसा की।
ताइवान फिल्म फेस्टिवल में मुमिन चेन ने भारतीय सिनेमा के प्रति अपनी रुचि व्यक्त की। उन्होंने बताया कि एक राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर और राजनयिक के रूप में, वह भारत में कई राजनीतिक विषयों पर आधारित फिल्में देखते हैं। इसी संदर्भ में, उन्होंने ‘धुरंधर’ को पिछले साल की सबसे प्रभावशाली भारतीय फिल्म बताया।
राजनीतिक फिल्मों में रुचि
चेन ने कहा कि उनकी राजनीतिक विज्ञान में रुचि के कारण वह भारतीय राजनीतिक फिल्मों को ध्यान से देखते हैं। उनके अनुसार, ये फिल्में देश की सामाजिक और राजनीतिक स्थितियों को समझने का एक साधन बन सकती हैं। उन्होंने कहा, “चूंकि मैं राजनीतिक विज्ञान का प्रोफेसर हूं और वर्तमान में राजदूत के रूप में कार्यरत हूं, इसलिए मैं भारत में कई राजनीतिक फिल्में देखता हूं। पिछले साल मैंने जो सबसे प्रभावशाली फिल्म देखी, वह ‘धुरंधर’ थी।” चेन की इस टिप्पणी ने फिल्म के प्रति चर्चा को बढ़ावा दिया है।
ताइवान फिल्म फेस्टिवल का आयोजन
ताइवान फिल्म फेस्टिवल का उद्देश्य भारतीय दर्शकों को ताइवान की संस्कृति, तकनीक और सिनेमा से अवगत कराना है। यह फेस्टिवल 24 और 25 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है, और इसके बाद 31 अक्टूबर को मुंबई में भी कार्यक्रम होगा। इस फेस्टिवल के माध्यम से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। दर्शकों को ताइवान की कहानियों, समाज और फिल्म निर्माण की शैली को समझने का अवसर मिलेगा।
भारत और ताइवान के बीच सांस्कृतिक संबंध
भारत और ताइवान के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध नहीं हैं। मुमिन चेन नई दिल्ली में ताइपे आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं। यह केंद्र दोनों पक्षों के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और अन्य गैर-औपचारिक संबंधों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ताइवान फिल्म फेस्टिवल जैसे आयोजन इसी सांस्कृतिक संपर्क को मजबूत करने का एक माध्यम हैं। चेन की ‘धुरंधर’ पर की गई टिप्पणी ने भारतीय फिल्मों में उनकी रुचि को उजागर किया है, साथ ही यह भी दर्शाया है कि भारतीय सिनेमा को अन्य देशों के प्रतिनिधि भी देखते हैं और उस पर अपनी राय साझा करते हैं।
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