Movie prime

क्या है 'इक्कीस' फिल्म की खासियत? जानें धर्मेंद्र की अदाकारी का जादू!

धर्मेंद्र की नई फिल्म 'इक्कीस' एक अनोखी युद्ध फिल्म है, जो सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की बहादुरी की कहानी को दर्शाती है। इस फिल्म में अदाकारी, भावनाएँ और एक गहरी कहानी है, जो दर्शकों को भावुक कर देती है। जानें इस फिल्म की खासियतें और क्यों इसे देखना चाहिए।
 
क्या है 'इक्कीस' फिल्म की खासियत? जानें धर्मेंद्र की अदाकारी का जादू!

धर्मेंद्र की अनोखी फिल्म 'इक्कीस'


धर्मेंद्र जी ने सभी के दिलों में एक विशेष स्थान बना लिया है। चाहे आप उनसे मिले हों या नहीं, उनकी फिल्मों और हाल के वीडियो के माध्यम से उन्होंने हर किसी के साथ एक अनूठा संबंध स्थापित किया है। '21' फिल्म देखते समय आपको यह संबंध महसूस होगा; वह आपको भावुक कर देंगे। मैडॉक फिल्म्स के प्रमुख दिनेश विजान ने इसे उनकी सबसे अनोखी फिल्म बताया है, और यह सच में ऐसा ही है। यह श्रीराम राघवन की एक विशेष कृति है, और जयदीप अहलावत के लिए भी यह एक अनोखी फिल्म है। इसे '19-20' नहीं, बल्कि '21' कहा जा सकता है; यह एक समझदारी से बनाई गई युद्ध फिल्म है।


कहानी का सार

यह फिल्म सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जिन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अद्वितीय साहस का प्रदर्शन किया था। वह परमवीर चक्र से सम्मानित होने वाले सबसे युवा सेना अधिकारी हैं। जब उनके टैंक में आग लगी, तो उन्हें टैंक छोड़ने का आदेश दिया गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इस प्रेरणादायक कहानी को थिएटर में देखना न भूलें।


फिल्म की विशेषताएँ

"इक्कीस" वास्तव में एक बेहतरीन फिल्म है। इसमें भारत-पाकिस्तान युद्ध की फिल्मों की तरह शोर-शराबा नहीं है। इसमें "दूध मांगोगे तो खीर देंगे" या "कश्मीर मांगोगे तो चीर देंगे" जैसे संवाद नहीं हैं, लेकिन जो कुछ भी है, वह दिल को छू लेने वाला है। यह फिल्म अरुण खेत्रपाल के 80 वर्षीय पिता के दृष्टिकोण से बताई गई है। इसकी धीमी गति इसकी असली खूबसूरती है, क्योंकि एक 80 वर्षीय व्यक्ति चीखता नहीं है। टैंक के दृश्य बहुत वास्तविक लगते हैं, और कम VFX का उपयोग किया गया है, जिससे आप टैंक को करीब से देख सकते हैं।


धर्मेंद्र की अदाकारी

धर्म जी को देखना एक अद्वितीय अनुभव है; उनके साथ हर दृश्य आपको भावुक कर देगा। असरानी के साथ एक दृश्य वास्तव में शानदार है; उन्हें एक साथ देखना अवास्तविक लगता है। दीपक डोबरियाल ने एक पाकिस्तानी सैनिक का किरदार निभाया है, और एक दृश्य में वह धर्म जी पर चिल्लाते हैं, जिसके बाद धर्म जी उन्हें गले लगाते हैं। यकीन मानिए, आपको लगेगा कि धर्म जी ने आपको गले लगाया है। उनकी स्क्रीन पर दिखाई गई प्रेम भावना थिएटर में भी महसूस होती है। गाने फिल्म की थीम के अनुसार हैं। अगर फिल्म थोड़ी छोटी होती, तो और भी बेहतर होती, लेकिन इसकी भावनात्मक गहराई इन छोटी-मोटी कमियों पर भारी पड़ती है।


एक्टिंग का जादू

धर्म जी इस फिल्म की आत्मा हैं। उन्हें स्क्रीन पर देखना एक अद्भुत अनुभव है, और इसे मिस नहीं करना चाहिए। जिस संवेदनशीलता और प्यार से उन्होंने इस किरदार को निभाया है, वह दर्शाता है कि वह कितने महान अभिनेता हैं। अगस्त्य नंदा ने साबित किया है कि वह अमिताभ बच्चन के परिवार से हैं, और अभिनय उनके खून में है। वह 21 वर्षीय अरुण खेत्रपाल की भूमिका में शानदार हैं, चाहे वह युद्ध के कॉलेज के दृश्य हों या अपनी प्रेमिका के साथ रोमांस।


राइटिंग और डायरेक्शन

'इक्कीस' को अरिजीत बिस्वास, श्रीराम राघवन और पूजा लाधा सुरती ने लिखा है, और श्रीराम राघवन ने इसे निर्देशित किया है। लेखन और निर्देशन दोनों ही बेहतरीन हैं। श्रीराम राघवन ने अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलकर एक अद्भुत प्रदर्शन दिया है।


अंतिम विचार

कुल मिलाकर, यह फिल्म देखने लायक है।


रेटिंग - 4 स्टार


OTT