क्या 'लव लॉटरी' फिल्म पुरुषों के दर्द को उजागर करती है? अक्षय ओबेरॉय का नया दृष्टिकोण
अक्षय ओबेरॉय की नई फिल्म 'लव लॉटरी'
नई दिल्ली, 22 अप्रैल। अभिनेता अक्षय ओबेरॉय अपनी आने वाली फिल्म 'लव लॉटरी' को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि यह फिल्म जेंडर से जुड़ी पारंपरिक धारणाओं को चुनौती देती है और यह महत्वपूर्ण सवाल उठाती है कि क्या दर्द, कमजोरी और भावनात्मक समस्याएं केवल एक जेंडर तक सीमित हैं।
अक्षय ओबेरॉय ने कहा, “'लव लॉटरी' का उद्देश्य लोगों की सोच को विस्तारित करना है। यह फिल्म जेंडर से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवादों और पूर्वाग्रहों पर गहराई से विचार करती है। आजकल हम जेंडर मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन अक्सर यह चर्चा एकतरफा होती है। फिल्म यह दर्शाती है कि पुरुष भी पीड़ित हो सकते हैं। उनकी आवाजें अक्सर अनसुनी रह जाती हैं और उनके अनुभवों को नजरअंदाज किया जाता है।”
उन्होंने आगे कहा, “यह फिल्म किसी एक पक्ष को नहीं लेती। इसका मकसद किसी को दोषी ठहराना नहीं है, बल्कि दर्शकों को सोचने का अवसर देना है। दर्द और कमजोरी किसी एक जेंडर की विशेषता नहीं है। जब हम मान लेते हैं कि पुरुष भी भावनात्मक संघर्ष कर सकते हैं, तो इससे बातचीत और गहरी होती है।”
अक्षय ने बताया कि एक अभिनेता के रूप में उन्हें ऐसी कहानियों में रुचि है जो समाज की सोच को चुनौती देती हैं। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि ऐसी फिल्मों का हिस्सा बनना महत्वपूर्ण है जो निष्कर्ष थोपने के बजाय सच्ची बातचीत को बढ़ावा दें। यदि 'लव लॉटरी' लोगों के बीच कुछ वास्तविक चर्चाएं शुरू कर पाती है, तो हमने कुछ सार्थक किया है। सहानुभूति किसी भी प्रगतिशील समाज की नींव होती है और यह फिल्म उसी सहानुभूति को बढ़ाने की दिशा में एक कदम है। 'लव लॉटरी' जेंडर की जटिलताओं को समझने और पुरुषों के अक्सर नजरअंदाज किए जाने वाले भावनात्मक संघर्ष को उजागर करने का प्रयास करती है।
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