क्या दर्शक अब भी सिनेमाघरों में लौट रहे हैं? जानें दो विशेषज्ञों की राय
सिनेमाघरों की स्थिति पर चर्चा
मुंबई, 1 जुलाई। साल 2026 के पहले छमाही के बाद, हिंदी फिल्म उद्योग के सामने यह महत्वपूर्ण प्रश्न उठ खड़ा हुआ है कि क्या दर्शक अब भी पहले की तरह सिनेमाघरों का रुख कर रहे हैं या उनकी पसंद में बदलाव आ चुका है। इस विषय पर देश के दो अनुभवी सिनेमाघर संचालकों ने अपने विचार साझा किए हैं।
मुंबई के प्रसिद्ध गेयटी गैलेक्सी के मालिक मनोज देसाई ने कहा कि पहले छह महीनों में रिलीज हुई फिल्मों में से अधिकांश ने अपेक्षित सफलता नहीं पाई। 'धुरंधर' और 'बॉर्डर 2' जैसी कुछ फिल्मों को छोड़कर, अन्य फिल्में दर्शकों को सिनेमाघरों तक लाने में असफल रहीं। यह स्थिति फिल्म उद्योग के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि अब दर्शकों के पास घर पर फिल्में देखने के कई विकल्प हैं।
उन्होंने आगे कहा कि ओटीटी प्लेटफार्मों का बढ़ता प्रभाव सिनेमाघरों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। पहले, सफल फिल्में कई हफ्तों तक चलती थीं, लेकिन अब यदि कोई फिल्म एक हफ्ते तक भी अच्छा प्रदर्शन कर ले, तो संचालक राहत की सांस लेते हैं। यह बदलाव पूरे उद्योग की तस्वीर को बदल चुका है।
मनोज ने अक्षय कुमार की फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े नामों की मौजूदगी भी फिल्म की सफलता की गारंटी नहीं होती। यदि कहानी दर्शकों को आकर्षित नहीं करती, तो वे फिल्म देखने नहीं आते।
जब उनसे पूछा गया कि फिल्म की सफलता में कलाकारों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है, तो उन्होंने कहा कि कहानी का महत्व सबसे अधिक है। आज के दर्शक केवल बड़े सितारों के नाम पर टिकट नहीं खरीदते। वे नई और रोचक कहानियों की तलाश में हैं।
मनोज ने यह भी बताया कि मुंबई जैसे शहरों में कई बार साउथ की फिल्में हिंदी फिल्मों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। दर्शक अब भाषा से अधिक कहानी और प्रस्तुति को महत्व दे रहे हैं।
वहीं, बिहार के पूर्णिया के सिनेमाघर संचालक अभिषेक चौहान ने पहले छह महीनों के कारोबार को संतोषजनक बताया। उन्होंने कहा कि 'धुरंधर', 'बॉर्डर 2', 'भूत बंगला' और 'वेलकम टू द जंगल' जैसी फिल्मों ने विभिन्न क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन किया है।
अभिषेक ने कहा कि फिल्म निर्माता अब ऐसी कहानियों की ओर लौट रहे हैं जो आम दर्शकों से जुड़ सकें। पहले, फिल्मों का ध्यान केवल बड़े शहरों के दर्शकों पर था, लेकिन अब निर्माता आम लोगों की भावनाओं और सरल विषयों को अपनी फिल्मों में शामिल कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 'हॉन्टेड' की सफलता उनके लिए सबसे बड़ी हैरानी थी। वहीं, इम्तियाज अली की फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' की शुरुआत धीमी रही, क्योंकि इसे मुख्य रूप से बड़े शहरों के दर्शकों के लिए बनाया गया था। अच्छी और मनोरंजक फिल्मों के लिए दर्शक आज भी सिनेमाघरों में पहुंच रहे हैं।
.png)