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क्या जम्मू-कश्मीर का फिल्म फेस्टिवल कांस को पीछे छोड़ सकता है? अकबर खान का बड़ा बयान

अकबर खान ने जम्मू-कश्मीर के पहले इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के महत्व पर प्रकाश डाला है। उन्होंने इसे कश्मीर के लिए एक विशेष अवसर बताया और उम्मीद जताई कि यह आयोजन सिनेमा की दुनिया में जम्मू-कश्मीर को एक नई पहचान दिलाएगा। खान ने सिनेमा की शक्ति और रचनात्मकता पर भी जोर दिया, साथ ही फिल्म फेस्टिवल के माध्यम से विचारों के आदान-प्रदान की आवश्यकता को बताया। जानें इस फेस्टिवल के बारे में और क्या कहा उन्होंने!
 

अकबर खान का जम्मू-कश्मीर के पहले इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल पर बयान




मुंबई, 7 सितंबर। अभिनेता अकबर खान ने जम्मू-कश्मीर में आयोजित होने वाले पहले इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के प्रति अपनी खुशी व्यक्त की है। उन्होंने इसे जम्मू-कश्मीर के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तथा आयोजन से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी।


अकबर खान ने कहा, ''कश्मीर, जिसे दुनिया जन्नत मानती है, में इस स्तर का फिल्म फेस्टिवल होना एक बड़ी उपलब्धि है। मुझे इस आयोजन में आमंत्रित किया जाना गर्व की बात है, और मुझे विश्वास है कि यह फेस्टिवल जम्मू-कश्मीर को सिनेमा की दुनिया में एक विशेष पहचान दिलाएगा।''


उन्होंने आगे कहा, ''सिनेमा विभिन्न देशों, संस्कृतियों और समाजों को जोड़ने का एक प्रभावशाली माध्यम है। फिल्मों में वह शक्ति होती है, जो विभिन्न विचारों और संस्कृतियों के बीच की दूरी को कम कर सकती है। जब किसी स्थान पर फिल्म फेस्टिवल होता है, तो यह केवल फिल्मों का प्रदर्शन नहीं होता, बल्कि यह लेखकों, निर्देशकों, कलाकारों और अन्य रचनात्मक व्यक्तियों के लिए विचारों का आदान-प्रदान करने का एक मंच भी होता है।''


अकबर खान ने कहा, ''हर फिल्म, चाहे वह ऐतिहासिक हो, सांस्कृतिक हो, या रोमांस और एक्शन से भरी हो, अपने साथ एक संदेश लेकर आती है। ऐसे में फिल्म फेस्टिवल उन रचनाकारों के काम को दर्शकों तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण साधन बन जाता है।''


उन्होंने फेस्टिवल की ओपनिंग फिल्म 'डेड डॉग' का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ''मैं इस फिल्म को देखने के लिए उत्सुक हूं और मुझे उम्मीद है कि चयन समिति ने फिल्म के चयन में उसकी वास्तविक योग्यता को ध्यान में रखा होगा। किसी फिल्म को केवल किसी विशेष विचारधारा या राजनीतिक माहौल के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सिनेमा को उसकी रचनात्मकता और क्षमता के आधार पर आंका जाना चाहिए।''


इतिहास पर अपनी राय व्यक्त करते हुए, अकबर खान ने कहा, ''इतिहास एक तथ्य है और समय के साथ नहीं बदलता। यदि किसी विशेष समय पर कोई ऐतिहासिक फिल्म बनाई गई है, तो उसे उस समय की कहानी और तथ्यों के अनुसार प्रस्तुत किया जाना चाहिए। सरकार या समय के बदलाव के साथ इतिहास के तथ्यों को बदलने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। फिल्म निर्माताओं को अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता के साथ-साथ इतिहास के प्रति जिम्मेदारी का भी ध्यान रखना चाहिए।''


श्रीनगर में फिल्म फेस्टिवल के आयोजन पर अकबर खान ने कहा, ''श्रीनगर और पूरा कश्मीर एक अद्भुत स्थान है। यदि यहां इसी जुनून और गंभीरता के साथ लगातार फिल्म फेस्टिवल आयोजित होते रहे, तो यह आयोजन भविष्य में दुनिया के प्रमुख फिल्म फेस्टिवल्स के साथ अपनी अलग पहचान बना सकता है। यह कांस फिल्म फेस्टिवल को भी पीछे छोड़ सकता है। यह मेरी व्यक्तिगत राय है।''


अकबर खान ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की भी सराहना की। उन्होंने कहा, ''फारूक अब्दुल्ला एक विद्वान और दूरदर्शी नेता हैं, जो एक ऐसे भारत की कल्पना करते हैं, जहां विभिन्न जाति, धर्म और समुदाय के लोग एक साथ रह सकें। वहीं, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का जम्मू-कश्मीर से जुड़े राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर दृष्टिकोण प्रभावशाली है।''


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