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क्या 'केडी: द डेविल' के गाने ने बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन किया? एनएचआरसी ने लिया संज्ञान

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने हाल ही में फिल्म 'केडी: द डेविल' के एक गाने पर गंभीर संज्ञान लिया है, जिसमें अश्लील और यौन उत्तेजक बोल होने का आरोप है। आयोग ने इसे बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन मानते हुए संबंधित संस्थाओं को नोटिस जारी किया है। जानें इस मामले में एनएचआरसी ने क्या कदम उठाए हैं और शिकायतकर्ता की मांगें क्या हैं।
 
क्या 'केडी: द डेविल' के गाने ने बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन किया? एनएचआरसी ने लिया संज्ञान

एनएचआरसी का गाने पर गंभीर संज्ञान


नई दिल्ली, 17 मार्च। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने हाल ही में रिलीज हुए गाने 'केडी: द डेविल' पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। आयोग का कहना है कि इस गाने में अश्लील और यौन उत्तेजक बोल हैं, जो बच्चों और नाबालिगों के लिए अनुपयुक्त हैं।


शिकायतकर्ता ने बताया कि यह गाना टेलीविजन, सोशल मीडिया और अन्य सार्वजनिक प्लेटफार्मों पर आसानी से उपलब्ध है, जिससे युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और नैतिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।


एनएचआरसी की पीठ, जिसका नेतृत्व सदस्य प्रियंक कानूनगो कर रहे हैं, ने मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत इस मामले को उठाया है। आयोग ने इसे बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन माना है।


शिकायत में यह भी कहा गया है कि मुख्यधारा के मनोरंजन में अश्लील गानों का बढ़ता चलन युवा दर्शकों में अनुचित व्यवहार को सामान्य बना रहा है।


आयोग ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एनएचआरसी ने संबंधित संस्थाओं को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर 'कार्रवाई रिपोर्ट' (एटीआर) मांगी है।


नोटिस प्राप्त करने वाले संस्थानों में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय और सरकारी मामले और सार्वजनिक नीति (गूगल इंडिया) शामिल हैं।


इन सभी को निर्देश दिया गया है कि वे शिकायत के आरोपों की जांच करें, गाने की सामग्री का अवलोकन करें, और आयोग को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। रिपोर्ट की एक प्रति बेंच-एमपीकेगॉवडॉटइन पर भी ईमेल करने के लिए कहा गया है। शिकायत की प्रति सभी संबंधित पक्षों को संलग्न की गई है।


एनएचआरसी ने स्पष्ट किया है कि आयोग को दीवानी न्यायालय की शक्तियां प्राप्त हैं और वह मानव अधिकारों की रक्षा के लिए कठोर कदम उठा सकता है। यदि दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट नहीं आती है, तो आयोग आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकता है।


शिकायतकर्ता ने आयोग से अनुरोध किया है कि वह संबंधित प्राधिकरणों को दिशा-निर्देश जारी करने के लिए कहे ताकि भविष्य में ऐसी सामग्री पर रोक लगाई जा सके और नाबालिगों के नैतिक वातावरण की रक्षा हो सके।


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