क्या किशोर कुमार की जीवनी को मिला पुरस्कार सही है? पटना हाईकोर्ट ने उठाए सवाल!
किशोर कुमार की जीवनी पर विवाद
प्रसिद्ध गायक और अभिनेता किशोर कुमार की जीवनी, ‘किशोर कुमार: द अल्टीमेट बायोग्राफी’, को 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘बेस्ट सिनेमा बुक’ का पुरस्कार मिलने पर विवाद उत्पन्न हो गया है। इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने यह जानने की कोशिश की है कि इस किताब को भारतीय सिनेमा से संबंधित श्रेणी में किस आधार पर रखा गया है।
इस मामले में पटना के हिंदी लेखक और साहित्यिक आलोचक अनंत प्रसाद सिन्हा ने याचिका दायर की है। वह साहित्यिक क्षेत्र में ‘अनंत’ के नाम से जाने जाते हैं। याचिका में उन्होंने 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘बेस्ट सिनेमा बुक’ के लिए दिए गए पुरस्कार को रद्द करने की मांग की है।
पुरस्कार की पात्रता पर उठाए सवाल
यह पुरस्कार अनिरुद्ध भट्टाचार्जी और पार्थिव धर द्वारा लिखी गई किताब ‘किशोर कुमार: द अल्टीमेट बायोग्राफी’ को प्रदान किया गया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि पुरस्कार की प्रक्रिया में मंत्रालय द्वारा निर्धारित पात्रता संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। याचिका में यह भी कहा गया है कि किताब को ‘बेस्ट सिनेमा बुक’ की श्रेणी में शामिल करने से पहले नियमों और पात्रता शर्तों का पालन करना आवश्यक था। याचिकाकर्ता ने इसी आधार पर पुरस्कार के चयन को चुनौती दी है।
हाईकोर्ट ने मंत्रालय और NFDC से मांगा जवाब
पटना हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ पुस्तक के नामांकन से जुड़े दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हुआ है। ये दिशा-निर्देश सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा 7 अक्टूबर 2024 को जारी अधिसूचना में दिए गए हैं। याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वरिष्ठ वकील ने शिकायतों पर जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से तीन सप्ताह का समय मांगा। अदालत ने सरकार की ओर से मांगे गए समय को स्वीकार कर लिया।
8 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
अदालत ने मंत्रालय और NFDC से जवाब मांगा है। फिलहाल, कोर्ट ने पुरस्कार रद्द करने के संबंध में कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। इस सुनवाई में केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं को अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि किताब को ‘बेस्ट सिनेमा बुक’ की श्रेणी में दिए गए पुरस्कार को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर अदालत का क्या रुख रहेगा। वर्तमान में विवाद का केंद्र किताब की विषयवस्तु नहीं, बल्कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की संबंधित श्रेणी में उसकी पात्रता और चयन प्रक्रिया से जुड़े नियम हैं।
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