क्या आप जानते हैं रेखा ने 'उमराव जान' के लिए क्यों नहीं लिया था एक भी पैसा?
रेखा का अमर किरदार 'उमराव जान'
मुंबई, 9 अक्टूबर। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कुछ भूमिकाएं ऐसी होती हैं, जो अभिनेताओं की पहचान बन जाती हैं। रेखा के लिए 'उमराव जान' ऐसा ही एक किरदार है। 1981 में रिलीज हुई इस फिल्म में रेखा ने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया, जिसकी जिंदगी में दर्द, प्यार, अकेलापन और शायरी के कई रंग शामिल थे। रेखा ने अपने अभिनय से इस किरदार को इस तरह जीवंत किया कि आज भी जब 'उमराव जान' का नाम लिया जाता है, तो उनका चेहरा याद आता है।
रेखा की फीस का दिलचस्प किस्सा
इस फिल्म से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी है। कहा जाता है कि रेखा ने इस फिल्म के लिए एक भी रुपए की फीस नहीं ली थी। फिल्म के निर्देशक मुजफ्फर अली ने इस बारे में खुलासा किया था कि रेखा ने ऐसा क्यों किया।
जून 2025 में 'उमराव जान' की री-रिलीज के अवसर पर मुजफ्फर अली ने एक इंटरव्यू में रेखा की फीस के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि यह एक दिल का मामला था। रेखा इस किरदार के प्रति इतनी समर्पित थीं कि वह इसके लिए कोई कीमत नहीं तय करना चाहती थीं।
निर्देशक की पसंद
मुजफ्फर अली ने कहा, ''उमराव जान के किरदार के लिए रेखा मेरी पहली पसंद थीं। मेरे मन में इस किरदार की एक छवि थी, जिसे रेखा ही सही तरीके से पर्दे पर उतार सकती थीं। उनकी आंखों में एक खास गहराई थी, जो उन्हें इस किरदार के लिए उपयुक्त बनाती थी।''
बताया जाता है कि रेखा को फिल्म में लेने के लिए मुजफ्फर अली अपनी पत्नी सुभाषिनी के साथ रेखा की मां के पास गए थे और उन्हें बताया कि वह 'उमराव जान' फिल्म बनाना चाहते हैं लेकिन फीस नहीं दे पाएंगे। रेखा जब घर आईं, तो उनकी मां ने उन्हें इस बारे में बताया। इसके बाद रेखा ने कहानी पर चर्चा करने के लिए उनसे मुलाकात की और कहानी में खो गईं।
रेखा की तैयारी
निर्देशक ने रेखा से कहा कि वह उन्हें फीस नहीं दे पाएंगे, लेकिन इस फिल्म के जरिए उन्हें अमर कर देंगे। इस फिल्म के लिए रेखा को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला।
मुजफ्फर अली ने बताया, ''रेखा ने उमराव जान के किरदार में ढलने के लिए शायरी पर विशेष ध्यान दिया। फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले शायरी पर काम लगभग एक साल पहले ही शुरू हो गया था। शायरी इस फिल्म की कहानी को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम थी। रेखा ने कविता और शायरी के माध्यम से किरदार की भावनाओं को समझा। फिल्म में उनकी अदायगी, बोलने का तरीका और चेहरे के भाव इसी तैयारी का हिस्सा थे।''
कहानी का सार
फिल्म में रेखा ने अमीरन का किरदार निभाया, जो परिस्थितियों के कारण उमराव जान बन जाती है। उसकी जिंदगी में कई चुनौतियाँ आती हैं, लेकिन वह अपनी कला, शायरी और अदाकारी के जरिए अपनी पहचान बनाती है।
'उमराव जान' मिर्जा हादी रुसवा के 1899 में प्रकाशित उर्दू उपन्यास 'उमराव जान अदा' पर आधारित थी। फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, फारूक शेख और राज बब्बर जैसे कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए थे। संगीत खय्याम ने दिया था और गानों में आवाज आशा भोसले ने दी थी।
.png)