Movie prime

कंगना रनौत की 'भारत भाग्य विधाता': क्या दर्शकों ने इसे सराहा या नकारा?

कंगना रनौत की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' ने दर्शकों के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएं प्राप्त की हैं। 26/11 के आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म में कंगना के अभिनय की सराहना की गई है, जबकि कुछ दर्शकों ने इसकी कहानी में खामियां भी बताई हैं। फिल्म नर्सों की भूमिका को उजागर करती है और दर्शकों को यह समझाने में सफल रही है कि हर कर्मचारी की अहमियत होती है। जानें और क्या कहते हैं दर्शक इस फिल्म के बारे में!
 
कंगना रनौत की 'भारत भाग्य विधाता': क्या दर्शकों ने इसे सराहा या नकारा?

फिल्म की रिलीज और दर्शकों की प्रतिक्रिया




मुंबई, 12 जून। कंगना रनौत की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' शुक्रवार को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई। यह फिल्म 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि पर आधारित है और इसे लेकर पहले से ही चर्चा का बाजार गर्म था। पहले दिन दर्शकों ने फिल्म देखी और अपने अनुभव साझा किए। अधिकांश ने कंगना के अभिनय और कहानी की तारीफ की, जबकि कुछ ने इसमें कुछ खामियां भी बताईं।


एक दर्शक ने कहा, ''फिल्म की कहानी और कलाकारों का प्रदर्शन बेहतरीन है, लेकिन 26/11 के कुछ दृश्यों को और यथार्थवादी तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता था। फिर भी, फिल्म का मुख्य संदेश प्रभावशाली है, जो यह दर्शाता है कि हर कर्मचारी की अपनी अहमियत होती है।''


एक अन्य दर्शक ने कहा, "यह फिल्म उन लोगों के लिए जरूरी है जो उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों को अधिक महत्व देते हैं। आम कर्मचारी भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। फिल्म ने यह स्पष्ट किया है कि नर्सें और अन्य स्वास्थ्यकर्मी समाज के लिए कितने आवश्यक हैं। कंगना ने अपने किरदार को बहुत समझदारी से निभाया है। इसमें कोई राजनीतिक एंगल नहीं है।"


एक और दर्शक ने कहा, "यह फिल्म उन लोगों को ज्यादा पसंद आएगी जो गंभीर कहानियों के प्रशंसक हैं। मसालेदार मनोरंजन की तलाश करने वालों को यह फिल्म अलग लग सकती है। कंगना का अभिनय दिल को छू जाता है। यह फिल्म नर्सिंग पेशे के प्रति लोगों की सोच को बदलने का प्रयास करती है। हालांकि, फिल्म का अंत थोड़ा कमजोर है, लेकिन मुझे विश्वास है कि यह बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करेगी।"


एक दर्शक ने कहा, "फिल्म में 26/11 हमले को नर्सों के दृष्टिकोण से दिखाना इसकी सबसे बड़ी ताकत है। यह दर्शाती है कि उस रात अस्पताल में मौजूद लोगों ने कितना डर और तनाव झेला होगा। फिल्म में अस्पताल का माहौल, मरीजों की चिंता और नर्सों की जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। कंगना ने शानदार अभिनय किया है। इसमें कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है।"


कुछ दर्शकों ने फिल्म देखने के बाद नर्सों के प्रति सम्मान भी व्यक्त किया। एक महिला दर्शक ने कहा, "फिल्म देखने के बाद मेरा हर नर्स को सलाम करने का मन कर रहा है। कंगना ने अपने किरदार में जान डाल दी है और लंबे समय बाद ऐसी फिल्म देखने को मिली है, जो दिल को छू जाती है।"


एक अन्य दर्शक ने फिल्म को पुरस्कार जीतने योग्य बताया। उन्होंने कहा, "निर्देशक और पूरी कलाकार टीम ने शानदार काम किया है। फिल्म का माहौल इतना वास्तविक है कि एक पल के लिए ऐसा लगता है मानो आप खुद 26/11 के दौर में मौजूद हों।"


फिल्म की कहानी 26 नवंबर 2008 की उस भयावह रात पर आधारित है, जब मुंबई आतंकी हमलों से दहल उठा था। कहानी कामा अस्पताल की नर्स गीता माधव गांधारे के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार कंगना रनौत ने निभाया है। फिल्म दिखाती है कि कैसे अस्पताल की साधारण नर्सें अचानक एक असाधारण परिस्थिति का सामना करती हैं। जब आतंकवादी अस्पताल में घुस जाते हैं, तब ये नर्सें बिना किसी हथियार और सुरक्षा के मरीजों, नवजात शिशुओं और अस्पताल में मौजूद सैकड़ों लोगों की जान बचाने के लिए आगे आती हैं।


फिल्म का पहला भाग नर्सों की रोजमर्रा की जिंदगी, उनके संघर्ष और अस्पताल के माहौल को दर्शाता है। वहीं, दूसरे भाग में 26/11 हमले की घटनाओं को दिखाया गया है.


OTT