Movie prime

इम्तियाज अली की नई फिल्म 'मैं वापस आऊंगा': बंटवारे की कहानी एक बुजुर्ग की नजर से

इम्तियाज अली की आगामी फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' 1947 के बंटवारे की दर्दनाक कहानियों को एक 78 वर्षीय बुजुर्ग के दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। इस फिल्म में बंटवारे के समय के संघर्ष और यादों को गहराई से दर्शाया गया है। इम्तियाज ने फिल्म की डिटेलिंग और शोध पर जोर दिया है, जिससे यह कहानी और भी प्रभावशाली बन गई है। जानें इस फिल्म में क्या खास है और इम्तियाज का दृष्टिकोण क्या है।
 
इम्तियाज अली की नई फिल्म 'मैं वापस आऊंगा': बंटवारे की कहानी एक बुजुर्ग की नजर से

इम्तियाज अली का नया पीरियड ड्रामा




मुंबई, 7 अप्रैल। निर्देशक इम्तियाज अली जल्द ही अपनी नई फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' के साथ दर्शकों के सामने आ रहे हैं। यह फिल्म 1947 के बंटवारे के समय के दर्द और संघर्ष को दर्शाती है। इम्तियाज का मानना है कि इस कहानी को 78 वर्षीय बुजुर्ग के दृष्टिकोण से देखना आवश्यक है।


हाल ही में एक बातचीत में, इम्तियाज ने फिल्म की कई महत्वपूर्ण जानकारियों को साझा किया।


उन्होंने कहा, "मैंने बचपन से बंटवारे की कहानियों का अध्ययन किया है। ये कहानियाँ बेहतरीन लेखकों द्वारा लिखी गई हैं और बहुत प्रेरणादायक हैं। मैंने उन लोगों की बातें भी सुनी हैं, जिन्होंने बंटवारे का अनुभव किया है। पंजाब में शूटिंग के दौरान, मुझे और भी कई कहानियाँ सुनने को मिलीं। यह देखकर कि लोग अब बंटवारे की घटनाओं को कैसे याद करते हैं, मुझे लगा कि उनका दृष्टिकोण बदल गया है।"


इम्तियाज ने आगे कहा, "आज जो बातें लोग याद करते हैं, वे पहले से काफी भिन्न हैं। मुझे लगता है कि बंटवारे की कहानी को एक 78 साल के बुजुर्ग के नजरिए से देखना चाहिए। हमारे आस-पास कई ऐसे लोग हैं जिनके परिवारों ने न केवल बंटवारे का दर्द सहा है, बल्कि प्रवासन और विस्थापन के अन्य पहलुओं का भी सामना किया है।"


इम्तियाज की फिल्मों में गहन शोध होता है। 'मैं वापस आऊंगा' में कॉस्ट्यूम, लेंस और लोकेशन पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने फिल्म की डिटेलिंग के बारे में बताया, "हम अक्सर अपनी यादों को उसी तरह देखते हैं जैसे फिल्म की नायिका ईशा बंटवारे से पहले की दुनिया को याद करती है। उसके मन में कॉलेज के समय की तस्वीरें हैं।"


उन्होंने कहा कि हर याद का एक अलग रंग और एहसास होता है। यह जरूरी नहीं कि वह वास्तविकता जैसी हो, लेकिन समय के साथ, जैसे 78 साल बाद, उन यादों में हल्की गुलाबी रंगत आ जाती है। उन्होंने कहा, "इसी सोच के साथ फिल्म की तस्वीरें तैयार की गई हैं। विशेष लेंस, रोशनी, कॉस्ट्यूम और कैमरा तकनीक का उपयोग करके यह दिखाने की कोशिश की गई है कि एक खूबसूरत याद कैसी महसूस होती है।"


OTT