सत्तू: बिहार का पारंपरिक सुपरफूड जो हर किसी को भाएगा!
सत्तू के फायदे: एक पारंपरिक भोजन की कहानी
Sattu Khane Ke Fayde
Sattu Khane Ke Faydeसत्तू के लाभ: हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट 2026 के दौरान बिहार का पारंपरिक भोजन सत्तू एक बार फिर से चर्चा का विषय बना। इस समिट में आए पत्रकारों और प्रतिनिधियों के लिए एक विशेष मीडिया किट में बिहार के सत्तू के साथ मखाने को भी शामिल किया गया। विदेश मंत्रालय का यह प्रयास भारत की विविध खाद्य परंपराओं और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करना है। सत्तू बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों के खानपान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
सत्तू कैसे बनता है?
सत्तू को आमतौर पर भुने हुए चने या अन्य अनाजों को पीसकर तैयार किया जाता है। इसे बनाना बेहद आसान है और इसके लिए ज्यादा तैयारी की आवश्यकता नहीं होती। यही कारण है कि इसे एक किफायती और आसानी से उपलब्ध पारंपरिक भोजन माना जाता है। पोषण से भरपूर होने के कारण इसे देसी सुपरफूड भी कहा जाता है।
सत्तू की विशेषताएँ
सत्तू में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम और कई अन्य आवश्यक पोषक तत्व होते हैं। ये तत्व इसे ऐसा भोजन बनाते हैं जो लंबे समय तक पेट को भरा रखता है और शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। सत्तू की एक खास बात यह है कि यह लंबे समय तक खराब नहीं होता, जिससे इसे आसानी से स्टोर किया जा सकता है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है, जबकि प्रोटीन मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
सत्तू के सेवन के फायदे
सत्तू का सेवन शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करने में सहायक होता है। इसमें मौजूद फाइबर के कारण पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। गर्मियों में पानी के साथ सत्तू का शरबत पीने से शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद मिलती है।
सत्तू का सेवन कैसे करें?
आप सत्तू को पानी में घोलकर, नींबू और मसालों के साथ मिलाकर पी सकते हैं। इसके अलावा, इससे सत्तू के पराठे, लिट्टी, विभिन्न पेय पदार्थ और कई पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। हालांकि, मधुमेह, किडनी रोग या किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या से ग्रसित लोगों को अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेनी चाहिए।
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