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क्या है मेरठ के शाकिर और मिंटू की दोस्ती का अनोखा उदाहरण? जानें 251 लीटर की कांवड़ यात्रा की कहानी!

मेरठ के शाकिर और मिंटू ने 251 लीटर की कांवड़ लेकर हरिद्वार से पैदल यात्रा की है, जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि दोस्ती और भाईचारे का भी संदेश देती है। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे जरूरतमंद कांवड़ियों की मदद करते नजर आ रहे हैं। इस यात्रा के माध्यम से उन्होंने यह साबित किया है कि दोस्ती धर्म और जाति से बड़ी होती है। जानें इस अनोखी यात्रा की पूरी कहानी।
 

कांवड़ यात्रा का अनूठा उदाहरण

Kanwar Yatra Viral Video:Meerut Friends Carry 251-Liter Kanwar Together

Kanwar Yatra Viral Video:Meerut Friends Carry 251-Liter Kanwar Together

कांवड़ यात्रा का वायरल वीडियो: सावन के महीने में कांवड़ यात्रा भगवान शिव की भक्ति का प्रतीक मानी जाती है। इस बार उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक तस्वीर सामने आई है, जो न केवल भक्ति का प्रतीक है, बल्कि दोस्ती और सामाजिक सौहार्द का भी संदेश देती है। मेरठ के फलावदा कस्बे के मुस्लिम युवक शाकिर और उनके हिंदू मित्र मिंटू हरिद्वार से 251 लीटर की कांवड़ लेकर पैदल यात्रा कर रहे हैं। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है, और लोग इसे हिंदू-मुस्लिम एकता की एक सुंदर मिसाल मान रहे हैं।


शाकिर और मिंटू की यात्रा

फलावदा कस्बे के 21 वर्षीय शाकिर इस साल अपने दोस्त मिंटू के साथ हरिद्वार से 251 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने गंगाजल भरने के बाद अपनी यात्रा शुरू की और पूरे रास्ते एक-दूसरे का सहयोग करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। शाकिर का कहना है कि यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि समाज में भाईचारे और आपसी सम्मान का संदेश देने का प्रयास है। उनका मानना है कि दोस्ती धर्म और जाति से कहीं बड़ी होती है।


पिछले साल की यात्रा

शाकिर ने पहले भी कांवड़ यात्रा का अनुभव लिया है। पिछले वर्ष उन्होंने 101 लीटर की कांवड़ उठाकर शिवरात्रि के अवसर पर स्थानीय शिव मंदिर में गंगाजल अर्पित किया था। इस बार उन्होंने अपने मित्र मिंटू के साथ 251 लीटर की कांवड़ उठाने का संकल्प लिया। दोनों का कहना है कि यह यात्रा उनके लिए आस्था के साथ-साथ विश्वास और दोस्ती को मजबूत करने का माध्यम है।


कांवड़ियों की मदद

यात्रा के दौरान शाकिर और मिंटू केवल अपनी मंजिल पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। रास्ते में जरूरतमंद कांवड़ियों की मदद करते हुए, वे कभी किसी की कांवड़ संभालते हैं तो कभी थके हुए श्रद्धालुओं की सहायता करते हैं। उनकी सेवा भावना ने अन्य कांवड़ियों को भी प्रभावित किया है।


सोशल मीडिया पर वायरल

दोनों दोस्तों का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हजारों लोग उनकी पहल की सराहना कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि यही भारत की असली पहचान है, जहां विभिन्न धर्मों के लोग एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हैं। कुछ ने इसे दोस्ती की सबसे खूबसूरत मिसाल बताया, जबकि कई ने इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म कहा।


कांवड़ उठाना है चुनौतीपूर्ण

इतनी बड़ी कांवड़ लेकर लंबी दूरी तक चलना कठिन होता है। इसके लिए शारीरिक क्षमता, संतुलन, धैर्य और टीमवर्क की आवश्यकता होती है। आमतौर पर 251 लीटर की कांवड़ दो या अधिक लोगों के सहयोग से उठाई जाती है। यही कारण है कि शाकिर और मिंटू की यात्रा लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।


कांवड़ यात्रा का महत्व

हर साल सावन में लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख और अन्य पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर अपने-अपने शिव मंदिरों तक पहुंचते हैं। इस दौरान भंडारे, चिकित्सा शिविर, विश्राम स्थल और सेवा शिविर लगाए जाते हैं। विभिन्न समुदायों के लोग कांवड़ियों के लिए भोजन, पानी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं।


Video:

Video : https://www.dailymotion.com/video/xasuo3y


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