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क्या कोल्ड ड्रिंक सेहत के लिए हानिकारक है? जानें इसके प्रभाव और बाजार हिस्सेदारी

कोल्ड ड्रिंक का सेवन भारतीय बाजार में तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके स्वास्थ्य पर प्रभाव और पर्यावरणीय लागत पर सवाल उठते हैं। जानें कि कैसे कोका-कोला, पेप्सी और कैंपा जैसे ब्रांडों की बाजार हिस्सेदारी है और एक लीटर शीतल पेय बनाने में कितने पानी की आवश्यकता होती है। क्या जीरो शुगर पेय सुरक्षित हैं? इस लेख में हम इन सभी सवालों का उत्तर देंगे और आपको सही जानकारी प्रदान करेंगे।
 

कोल्ड ड्रिंक के स्वास्थ्य प्रभाव

Cold Drink Health Effects | Pepsi India Market Share | Newstrack Special Hindi

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कोल्ड ड्रिंक के स्वास्थ्य प्रभाव: चाहे गर्मी हो या सर्दी, कोका-कोला, पेप्सी और अन्य शीतल पेय भारतीय बाजार में महत्वपूर्ण स्थान बना चुके हैं। कंपनियों के बीच बाजार पर नियंत्रण की प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है। उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, भारत के कार्बोनेटेड पेय बाजार में कोका-कोला की हिस्सेदारी लगभग 40-42 प्रतिशत, पेप्सिको की 28-30 प्रतिशत और कैंपा की 7-8 प्रतिशत है। लेकिन इस उद्योग की कहानी केवल बिक्री और लाभ तक सीमित नहीं है। एक लीटर शीतल पेय बनाने में एक लीटर से अधिक पानी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, इन पेयों में मौजूद चीनी, अम्ल और कैफीन के स्वास्थ्य पर प्रभाव भी चिंता का विषय हैं।


भारत के शीतल पेय बाजार में हिस्सेदारी

जुलाई 2026 में जारी उद्योग अनुमानों के अनुसार, कार्बोनेटेड शीतल पेय बाजार में कोका-कोला की हिस्सेदारी लगभग 40-42 प्रतिशत, पेप्सिको की 28-30 प्रतिशत और कैंपा की 7-8 प्रतिशत है। ये आंकड़े सरकारी प्रमाणित नहीं हैं, बल्कि उद्योग के अनुमान हैं। बाजार हिस्सेदारी की गणना बिक्री की मात्रा या कुल मूल्य के आधार पर भिन्न हो सकती है।


कोका-कोला, पेप्सिको और कैंपा का कारोबार

पेप्सिको इंडिया ने 2025 में लगभग 9,798 करोड़ रुपये का समेकित राजस्व प्राप्त किया, जिसमें खाद्य उत्पादों का कारोबार भी शामिल है।

वरुण बेवरेजेज, पेप्सिको के प्रमुख बॉटलिंग साझेदार, ने 2025 में लगभग 21,685 करोड़ रुपये का वैश्विक परिचालन राजस्व दर्ज किया। भारत में, कंपनी ने लगभग 83.9 करोड़ यूनिट केस पेय बेचे, जो लगभग 476 करोड़ लीटर के बराबर है।

कोका-कोला इंडिया ने वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 5,043 करोड़ रुपये की बिक्री की। उसकी प्रमुख बॉटलिंग कंपनी हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेज का इसी अवधि का राजस्व लगभग 12,751 करोड़ रुपये रहा।

कैंपा की सकल बिक्री 2025-26 में 4,700 करोड़ रुपये से अधिक रही, जिससे कंपनी ने कई प्रमुख बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है।


कोल्ड ड्रिंक बनाने में पानी की खपत

शीतल पेय उद्योग के लिए पानी सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल है। उत्पादन प्रक्रिया में बोतल में दिखाई देने वाले पानी से अधिक पानी की आवश्यकता होती है। कोका-कोला के अनुसार, 2025 में उसकी वैश्विक उत्पादन प्रणाली का औसत जल उपयोग अनुपात 1.77 लीटर प्रति लीटर पेय था।

वरुण बेवरेजेज की 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में यह अनुपात 1.50 लीटर प्रति लीटर पेय बताया गया।


कोल्ड ड्रिंक की शेल्फ लाइफ

बंद बोतल में रखा शीतल पेय कई महीनों तक सुरक्षित रह सकता है। इसका कारण खाद्य विज्ञान और नियंत्रित उत्पादन प्रक्रिया है। कार्बोनेटेड शीतल पेय को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में अम्लीय प्रकृति, घुली हुई कार्बन डाइऑक्साइड, साफ-सुथरी उत्पादन प्रक्रिया और बंद पैकेजिंग मदद करती हैं।


कोल्ड ड्रिंक में चीनी की मात्रा

शीतल पेयों में मौजूद अतिरिक्त चीनी स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है। अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार, 355 मिलीलीटर सामान्य सोडा में लगभग 42 ग्राम अतिरिक्त चीनी हो सकती है।


क्या कोल्ड ड्रिंक से स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है?

शीतल पेयों के स्वास्थ्य प्रभावों पर कई अध्ययन किए गए हैं। एक अध्ययन में पाया गया कि 2020 में टाइप-2 मधुमेह और हृदय संबंधी बीमारियों के नए मामलों का संबंध चीनी मिले पेयों से था।


क्या जीरो शुगर पेय सुरक्षित हैं?

जीरो शुगर और डाइट पेयों में सामान्य चीनी के स्थान पर मिठास देने वाले पदार्थ होते हैं। हालांकि, कम कैलोरी होना और स्वास्थ्यवर्धक होना एक ही बात नहीं है।


प्लास्टिक की बोतलें और पर्यावरण

शीतल पेय उद्योग का पर्यावरणीय प्रभाव केवल पानी की खपत तक सीमित नहीं है। प्लास्टिक की बोतलें, पैकेजिंग और कचरा प्रबंधन भी महत्वपूर्ण हैं।


उपभोक्ता का अधिकार

उपभोक्ताओं को उत्पाद की सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी देखकर चुनाव करना चाहिए। कंपनियों को यह स्पष्ट बताना चाहिए कि उनके उत्पाद में कितनी चीनी और कैफीन है।


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