क्या आप भी बन सकते हैं ठगी का शिकार? जानिए मिलग्राम प्रयोग से क्या सीखें!
मिलग्राम प्रयोग: एक अनोखा मनोवैज्ञानिक अध्ययन
Milgram Experiment | Stanley Milgram | Milgram Experiment Hindi Newstrack Hindi News
Milgram Experiment | Stanley Milgram | Milgram Experiment Hindi Newstrack Hindi Newsमिलग्राम प्रयोग का परिचय: यदि कोई गंभीरता से भरा व्यक्ति, जो कोट पहने हो, आपसे कहे कि बगल के कमरे में बैठे एक अजनबी को झटका देते रहें, भले ही वह चीख रहा हो, तो आप कितनी देर तक ऐसा करेंगे? अधिकांश लोग कहेंगे कि वे जल्दी रुक जाएंगे। 1961 में अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी में हुए एक प्रयोग ने इस आत्मविश्वास को चुनौती दी। आज भारत में जो ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या नारकोटिक्स अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट कर लेते हैं, वे अनजाने में इसी प्रयोग की सीख का उपयोग कर रहे हैं।
1961: एक मुक़दमे ने उठाया सवाल
1961 में इज़राइल में नाज़ी अधिकारी एडॉल्फ़ आइखमान पर मुक़दमा चल रहा था, जिसमें उस पर लाखों यहूदियों की हत्या का आरोप था। उसकी सफाई थी कि उसने केवल आदेशों का पालन किया। येल के सामाजिक मनोवैज्ञानिक स्टैनली मिलग्राम ने सोचा कि क्या ऐसे लोग विशेष रूप से क्रूर होते हैं, या कोई भी सामान्य व्यक्ति परिस्थितियों के दबाव में ऐसा कर सकता है? उन्होंने इसे प्रयोगशाला में परखने का निर्णय लिया।
प्रयोग की प्रक्रिया
अख़बार में विज्ञापन देकर 20 से 50 साल के पुरुषों को बुलाया गया, जिन्हें एक घंटे के लिए लगभग 4.5 डॉलर का भुगतान करने का वादा किया गया। उन्हें बताया गया कि यह सज़ा के प्रभाव को समझने वाला प्रयोग है। हर प्रतिभागी का सामना एक अभिनेता से कराया गया, जिसे एक छात्र के रूप में पेश किया गया। पर्ची निकालने का दिखावा किया गया, लेकिन हमेशा यह तय था कि असली प्रतिभागी शिक्षक बने और अभिनेता छात्र। छात्र को कुर्सी से बांधकर बगल के कमरे में रखा गया और शिक्षक के सामने एक झटका-मशीन रखी गई, जिसमें 15 से 450 वोल्ट तक 30 स्विच थे।
प्रयोग के नतीजे
मिलग्राम ने पहले मनोचिकित्सकों से अनुमान पूछा था, और उनका मानना था कि शायद एक प्रतिशत से भी कम लोग अंत तक जाएंगे। लेकिन पहले प्रयोग में 40 में से सभी 40 प्रतिभागी 300 वोल्ट तक पहुंचे, और 26 यानी 65% ने पूरे 450 वोल्ट तक का झटका दिया। ये लोग निर्दयी नहीं थे; कई पसीने में तर थे, कांप रहे थे, और कुछ घबराहट में हंस रहे थे।
परिवर्तनशील परिणाम
मिलग्राम ने इस प्रयोग के कई रूपों का परीक्षण किया। जब छात्र उसी कमरे में था, तो 450 वोल्ट तक जाने वाले प्रतिभागियों की संख्या घटकर लगभग 40% रह गई। जब प्रयोगकर्ता केवल फोन पर था, तो आज्ञापालन काफी गिर गया।
आलोचना और नैतिकता
यह प्रयोग उतना सीधा नहीं है जितना दिखता है। नैतिकता का सवाल पहले दिन से उठता रहा है, क्योंकि प्रतिभागियों को भारी मानसिक तनाव दिया गया और वे धोखे में थे।
भारत में डिजिटल अरेस्ट का मामला
भारत में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई चीज़ नहीं है। कोई भी पुलिस या सरकारी एजेंसी आपको वीडियो कॉल पर गिरफ़्तार नहीं कर सकती। फिर भी, यह ठगी भयावह पैमाने पर फैली है।
ठग की स्क्रिप्ट और मिलग्राम का सबक
एक बेंगलुरु के सॉफ़्टवेयर इंजीनियर का मामला देखें, जिसने ठगों के झांसे में आकर 11.8 करोड़ रुपये भेज दिए। ठगों की स्क्रिप्ट में पुलिस की वर्दी, धीरे-धीरे बढ़ता दबाव, और अकेलापन शामिल होता है।
बचाव के उपाय
यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि कोई असली एजेंसी कॉल पर पैसे नहीं मांगती। जब भी डर पैदा करने वाला कॉल आए, तुरंत फ़ोन काट दें।
हम सब थोड़े ‘शिक्षक’ हैं
मिलग्राम का सबसे बड़ा सबक यह है कि इंसान को अपने आप पर ज़रूरत से ज़्यादा भरोसा होता है। अधिकार, डर और अकेलेपन का मेल किसी को भी मोड़ सकता है।
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