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क्या आप जानते हैं प्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में क्या अंतर है?

क्या आप जानते हैं प्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में क्या अंतर है? इस लेख में हम समझेंगे कि प्रोसेसिंग का असली अर्थ क्या है, NOVA वर्गीकरण प्रणाली के अनुसार खाद्य पदार्थों को कैसे वर्गीकृत किया जाता है, और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के स्वास्थ्य पर प्रभाव क्या होते हैं। जानें कि क्या हर प्रोसेस्ड फूड बुरा होता है या नहीं।
 

प्रोसेस्ड फूड बनाम अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड

Processed Food vs Ultra Processed Food Explained in Hindi

Processed Food vs Ultra Processed Food Explained in Hindi

प्रोसेस्ड फूड बनाम अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड: 'प्रोसेस्ड फूड से बचें' यह सलाह अक्सर स्वास्थ्य लेखों, चिकित्सकों और फिटनेस विशेषज्ञों से सुनने को मिलती है। लेकिन यदि हम ध्यान से देखें, तो जो भी हम खाते हैं, वह किसी न किसी रूप में प्रोसेस्ड होता है। चाहे वह दूध, आटा या जमी हुई सब्जियां हों। असली सवाल यह है कि 'प्रोसेसिंग' का अर्थ वास्तव में क्या है? 'अल्ट्रा-प्रोसेस्ड' से इसका क्या अंतर है, और इन्हें इतना नकारात्मक क्यों माना जाता है?


प्रोसेसिंग का असली अर्थ

यह समझना आवश्यक है कि प्रोसेसिंग कोई नकारात्मक प्रक्रिया नहीं है। किसी भी खाद्य पदार्थ को उसकी प्राकृतिक स्थिति से बदलकर खाने योग्य या अधिक टिकाऊ बनाने की प्रक्रिया को प्रोसेसिंग कहा जाता है। इसमें धोना, काटना, पकाना, सुखाना, जमाना या किण्वन शामिल हैं। इस दृष्टिकोण से, घर में बनी दाल-चावल भी प्रोसेस्ड मानी जाती है, क्योंकि इसे धोया, भिगोया और पकाया गया है। इसलिए, प्रोसेसिंग अपने आप में कोई समस्या नहीं है, बल्कि यह मानव सभ्यता के साथ-साथ विकसित हुई एक आवश्यक प्रक्रिया है, जिसने खाद्य सुरक्षा, पाचन में आसानी और दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित किया है।


NOVA वर्गीकरण प्रणाली

खाद्य पदार्थों को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने 'NOVA वर्गीकरण प्रणाली' विकसित की है। यह प्रणाली ब्राजील के शोधकर्ता कार्लोस मोंटेइरो और उनकी टीम द्वारा बनाई गई थी और इसे पोषण विज्ञान में सबसे विश्वसनीय वर्गीकरण प्रणालियों में से एक माना जाता है। यह खाद्य पदार्थों को उनके प्रोसेसिंग स्तर के आधार पर चार श्रेणियों में विभाजित करती है।


ग्रुप 1: अनप्रोसेस्ड या न्यूनतम प्रोसेस्ड खाना

इस श्रेणी में वे खाद्य पदार्थ शामिल हैं जो सीधे प्रकृति से प्राप्त होते हैं या जिनमें केवल धोना, छीलना, काटना, सुखाना या फ्रीज करना जैसी बुनियादी प्रक्रियाएं होती हैं। ताजे फल, सब्जियां, अंडे, दालें, दूध और सादा दही इसी श्रेणी में आते हैं।


ग्रुप 2: प्रोसेस्ड पाक सामग्री

इसमें वे चीजें आती हैं जो सीधे नहीं खाई जातीं, बल्कि खाना बनाने में इस्तेमाल होती हैं, जैसे तेल, घी, नमक, चीनी और शहद। ये ग्रुप एक के खाद्य पदार्थों से ही निकाले या दबाकर बनाए जाते हैं।


ग्रुप 3: प्रोसेस्ड फूड

यहां से असली प्रोसेस्ड फूड की परिभाषा शुरू होती है। यह वह खाना है जो ग्रुप एक के खाद्य पदार्थों में ग्रुप दो की चीजें (जैसे नमक, चीनी, तेल) मिलाकर बनाया जाता है। इसके उदाहरण हैं डिब्बाबंद सब्जियां, नमक लगी मूंगफली, ताजा बनी ब्रेड, पनीर और अचार।


ग्रुप 4: अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड

यह श्रेणी सबसे अधिक चर्चा में रहती है। यह ऐसा खाना है जो ज्यादातर या पूरी तरह से ऐसे पदार्थों से बना होता है जो खाने से निकाले गए तत्वों और प्रयोगशाला में बने योजकों से तैयार होता है। इसके उदाहरण हैं पैकेज्ड चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, इंस्टेंट नूडल्स, पैकेज्ड बिस्किट और प्रोसेस्ड मीट।


अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के दुष्प्रभाव

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को केवल 'ज्यादा चीनी या नमक' के कारण नहीं, बल्कि कई वैज्ञानिक कारणों से नकारात्मक माना जाता है। यह इतना स्वादिष्ट होता है कि इसे रोकना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, इसकी प्रोसेसिंग के कारण फाइबर और प्राकृतिक बनावट में कमी आती है, जिससे यह स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।


क्या हर प्रोसेस्ड फूड बुरा है?

यह महत्वपूर्ण है कि हम ग्रुप तीन के प्रोसेस्ड फूड को अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के समान न समझें। असली चिंता ग्रुप चार के अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के बारे में है। इसलिए, केवल प्रोसेस्ड शब्द देखकर किसी चीज से पूरी तरह परहेज करना आवश्यक नहीं है, बल्कि यह समझना जरूरी है कि वह किस श्रेणी में आती है।


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