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ISBN: पुस्तक की पहचान का रहस्य और इसकी महत्वपूर्ण भूमिका

ISBN, या International Standard Book Number, एक महत्वपूर्ण संख्या है जो किसी पुस्तक की पहचान करती है। यह संख्या प्रकाशन उद्योग में एक मानक के रूप में कार्य करती है, जिससे पुस्तक विक्रेता और पाठक आसानी से किसी विशेष पुस्तक को पहचान सकें। इस लेख में, हम ISBN के इतिहास, इसकी संरचना, और इसके महत्व के बारे में जानेंगे। क्या आप जानते हैं कि ISBN और कॉपीराइट में क्या अंतर है? इस लेख में आपको सभी जानकारी मिलेगी।
 

ISBN क्या है?

ISBN Meaning

ISBN Meaning

ISBN की परिभाषा: किसी पुस्तक के पिछले कवर या कॉपीराइट पृष्ठ पर एक लंबी संख्या होती है, जिसके आगे 'ISBN' लिखा होता है। यह संख्या अब इतनी सामान्य हो गई है कि अधिकांश पाठक इसे देखे बिना ही पुस्तक पढ़ना शुरू कर देते हैं। लेकिन प्रकाशन क्षेत्र में, यह संख्या किसी पुस्तक की पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ISBN का पूरा नाम International Standard Book Number है, यानी अंतरराष्ट्रीय मानक पुस्तक संख्या। वर्तमान में, ISBN 13 अंकों का होता है और इसका उद्देश्य किसी विशेष पुस्तक के संस्करण और प्रारूप की पहचान करना है, जिससे पुस्तक विक्रेता, प्रकाशक, वितरक, पुस्तकालय, विश्वविद्यालय, ऑनलाइन बुकस्टोर और अंतरराष्ट्रीय पुस्तक व्यापार की प्रणालियाँ इसे आसानी से पहचान सकें। यह जानना आवश्यक है कि ISBN लेखक का व्यक्तिगत नंबर नहीं होता और न ही यह केवल पुस्तक के शीर्षक का नंबर होता है। वास्तव में, ISBN किसी विशेष प्रकाशन उत्पाद की पहचान है। इसलिए, एक ही लेखक की कई पुस्तकों के लिए अलग-अलग ISBN हो सकते हैं, और उसी पुस्तक के विभिन्न प्रारूपों के लिए भी अलग ISBN हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय ISBN एजेंसी के अनुसार, वर्तमान ISBN पाँच तत्वों से मिलकर बनता है और 1 जनवरी 2007 से यह हमेशा 13 अंकों का होता है; इससे पहले, ISBN 10 अंकों का होता था.


व्यावहारिक समस्या से निकली व्यवस्था

बीसवीं शताब्दी के मध्य तक प्रकाशकों की संख्या में वृद्धि हो चुकी थी। नए संस्करण तेजी से प्रकाशित हो रहे थे, और पुस्तक विक्रेताओं को हजारों शीर्षकों का रिकॉर्ड रखना पड़ता था। समस्या यह थी कि कई पुस्तकों के नाम समान हो सकते थे, और एक ही लेखक अपनी पुस्तक को विभिन्न प्रकाशकों से प्रकाशित कर सकता था। इसी आवश्यकता ने ISBN प्रणाली को जन्म दिया।


ब्रिटेन से हुई शुरुआत

इस प्रणाली की औपचारिक शुरुआत 1965 में ब्रिटेन में हुई। प्रसिद्ध पुस्तक विक्रेता कंपनी W.H. Smith ने अपने गोदाम को कंप्यूटरीकृत करने के लिए एक मानक संख्या की आवश्यकता महसूस की। इस आवश्यकता ने मानक पुस्तक संख्या प्रणाली के निर्माण की प्रक्रिया को गति दी। एक नौ-अंकीय Standard Book Number (SBN) प्रणाली विकसित की गई, जिसमें अंतिम अंक एक 'चेक डिजिट' था। ब्रिटेन इस प्रणाली को अपनाने वाला पहला देश बना।


तेरह अंकों का कोड

1970 से 2006 तक ISBN मुख्यतः 10 अंकों का रहा। लेकिन वैश्विक प्रकाशन उद्योग के विस्तार के कारण संख्या की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता महसूस हुई। इसलिए, 1 जनवरी 2007 से ISBN को 13 अंकों का कर दिया गया। आज सभी ISBN 13 अंकों के होते हैं और उनकी शुरुआत 978 या 979 से होती है।


कॉपीराइट से अलग है

ISBN और कॉपीराइट को अक्सर एक ही चीज समझा जाता है, जबकि ये दोनों अलग अवधारणाएँ हैं। ISBN प्राप्त करने से लेखक को अपने लेखन पर कॉपीराइट नहीं मिलता। ISBN केवल पुस्तक की पहचान से संबंधित है।


अंतर्राष्ट्रीय संचालन की व्यवस्था

ISBN का अंतरराष्ट्रीय संचालन एक बहुस्तरीय व्यवस्था से होता है। ISO ने ISBN को अंतरराष्ट्रीय मानक के रूप में मान्यता दी है और International ISBN Agency को वैश्विक Registration Authority के रूप में नियुक्त किया गया है।


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