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सितंबर में आकाश में क्या खास है? जानें खगोलीय घटनाओं का रहस्य!

सितंबर का महीना खगोल प्रेमियों के लिए विशेष अवसर लेकर आया है। इस महीने कई अद्भुत खगोलीय घटनाएं देखने को मिलेंगी, जैसे 23 सितंबर को शरद विषुव, जब दिन और रात की अवधि समान होगी। इसके अलावा, 26 सितंबर को हार्वेस्ट मून अपनी लाल आभा के साथ रात के आकाश को रोशन करेगा। जानें इस महीने की अन्य खगोलीय घटनाओं के बारे में, जैसे इप्साइलन उल्का वर्षा और ग्रहों की स्थिति।
 

सितंबर में खगोल प्रेमियों के लिए विशेष अवसर

सितंबर आकाशीय घटनाएं (सोशल मीडिया से)

सितंबर आकाशीय घटनाएं

प्रयागराज: सितंबर का महीना खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए एक अद्भुत समय है। इस महीने, पृथ्वी, सूर्य, चंद्रमा और उल्कापिंडों की कई अनोखी खगोलीय घटनाएं देखने को मिलेंगी। 23 सितंबर को 'शरद विषुव' (ऑटमनल इक्विनॉक्स) के कारण दिन और रात की अवधि समान रूप से 12-12 घंटे होगी, जबकि 26 सितंबर को पूर्णिमा पर 'हार्वेस्ट मून' अपनी लाल आभा के साथ रात के आकाश को रोशन करेगा। इसके अलावा, ग्रहों की स्थिति और तेज गति से गिरने वाले उल्कापिंड पूरे महीने आकाश में रोमांच बनाए रखेंगे।


23 सितंबर को शरद विषुव: दिन और रात का समान संतुलन

सूर्य की सीधी किरणें: 23 सितंबर को सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी की भूमध्य रेखा पर लंबवत पड़ेंगी, जिसे शरद विषुव कहा जाता है।

समान संतुलन: इस दिन उत्तरी और दक्षिणी गोलार्धों में दिन और रात का समय लगभग 12-12 घंटे होगा। यह संतुलन साल में दो बार—21 मार्च (वसंत विषुव) और 23 सितंबर (शरद विषुव) को बनता है।

ऋतु परिवर्तन का संकेत: यह खगोलीय घटना उत्तरी गोलार्ध में शरद ऋतु के आगमन और दिन के छोटे होने की शुरुआत का संकेत देती है.


26 सितंबर को 'हार्वेस्ट मून' और उसकी लाल आभा

शरद विषुव के निकटतम पूर्णिमा के चांद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'हार्वेस्ट मून' या 'कॉर्न मून' कहा जाता है।

नामकरण का आधार: यह समय पश्चिमी और उत्तरी देशों में फसलों की कटाई का होता है, खासकर मक्के की। शाम होते ही चांद जल्दी निकलता है, जिससे किसानों को रात में भी कटाई के लिए प्राकृतिक रोशनी मिलती है।

लाल आभा का वैज्ञानिक कारण: क्षितिज से उगते समय हार्वेस्ट मून हल्का लाल या नारंगी नजर आ सकता है। इसका कारण वायुमंडलीय अपवर्तन और 'रेले स्कैटरिंग' है। चंद्रमा की रोशनी वायुमंडल की मोटी परत से गुजरती है, जिससे नीली और बैंगनी रोशनी बिखर जाती है और केवल लाल-नारंगी रोशनी हमारी आंखों तक पहुंचती है।


9 सितंबर को इप्साइलन उल्का वर्षा

सितंबर के पहले सप्ताह में 'ऑरिगिड्स' उल्कापात के बाद, 9 सितंबर को 'इप्साइलन पर्सीड्स' उल्का वर्षा अपने चरम पर होगी।

अभूतपूर्व गति: ये उल्कापिंड लगभग 64 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में प्रवेश करेंगे।

देखने का सही समय: भोर से ठीक पहले, प्रदूषण रहित और साफ आसमान वाले स्थानों पर बिना दूरबीन के भी इन 'टूटते तारों' की चमक देखी जा सकेगी।


ग्रहों की स्थिति और चंद्रमा की जुगलबंदी

जवाहर तारामंडल की पूर्व विज्ञानी सुरूर फातिमा के अनुसार, इस महीने सौरमंडल के ग्रह विभिन्न कोणों पर दिखाई देंगे:

चंद्रमा संग मुलाकात: चंद्रमा 8 सितंबर को देवगुरु बृहस्पति, 12 को बुध और 14 सितंबर को शुक्र के करीब नजर आएगा। 27 सितंबर को चंद्रमा और छल्लेदार शनि ग्रह एक साथ दिखाई देंगे।

सूर्य और बुध का गोचर: सूर्य वर्तमान में सिंह राशि में है, जो 18 सितंबर को कन्या राशि में प्रवेश करेगा। वहीं, कन्या राशि में बुध ग्रह माह के प्रारंभ में शाम करीब 6:15 बजे पश्चिमी क्षितिज में अस्त हो रहा है।


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