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जानें शारदीय नवरात्रि 2026 में मां शैलपुत्री की पूजा विधि और महत्व

शारदीय नवरात्रि 2026 में मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व और विधि जानें। इस लेख में हम मां शैलपुत्री के स्वरूप, पूजा के आध्यात्मिक लाभ और विधि के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। जानें कैसे इस पूजा से साधक को स्थिरता, आत्मबल और सफलता प्राप्त होती है।
 

शारदीय नवरात्रि 2026: मां शैलपुत्री का स्वरूप

Sharadiya Navratri 2026 Maa Shailputri Puja Vidhi |Ma Durga Mantra Jap | Newstrack Hindi

Sharadiya Navratri 2026 Maa Shailputri Puja Vidhi |Ma Durga Mantra Jap | Newstrack Hindi

शारदीय नवरात्रि 2026 में मां शैलपुत्री: नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री की पूजा के लिए समर्पित है। इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। मां शैलपुत्री देवी सती का पुनर्जन्म हैं, जिन्होंने दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपने प्राणों की आहुति दी थी। इनका वाहन नंदी वृषभ है और इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल तथा बाएं हाथ में कमल का फूल है।

मां शैलपुत्री को सम्पूर्ण हिमालय लोक की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।


आध्यात्मिक महत्व

मां शैलपुत्री की उपासना से साधक का मूलाधार चक्र सक्रिय होता है। यह चक्र स्थिरता, आत्मबल और आध्यात्मिक शक्ति का स्रोत है। मां की पूजा से साधक को धैर्य, संयम और दृढ़ता प्राप्त होती है।


पूजन विधि

1. प्रातः स्नान करके स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र पहनें।

2. लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

3. चौकी पर केसर से “शं” लिखें और मनोकामना पूर्ति गुटिका रखें।

4. कलश स्थापना करें और घी का अखंड दीप जलाएं।

5. मां को लाल पुष्प, लाल चुनरी और सुगंधित धूप-दीप अर्पित करें।

6. मां का ध्यान करते हुए यह मंत्र जपें – ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चै ॐ शैलपुत्री देव्यै नमः।

7. हाथ में लिया हुआ पुष्प मां के चित्र और गुटिका पर अर्पित करें।

8. मां को शुद्ध घी का भोग लगाएं।

9. 108 बार मां के मंत्र का जप करें।


स्तोत्र पाठ

प्रथम दुर्गा त्वम् हि भवसागर: तारणीम्।

धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥

त्रिलोकजननी त्वम् हि परमानंद प्रदीयमान्।

सौभाग्यारोग्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥

चराचरेश्वरी त्वम् हि महामोह: विनाशिनी।

मुक्ति भुक्ति दायिनीम् शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥


पूजन का फल

मां शैलपुत्री की पूजा से आरोग्य की प्राप्ति होती है।

गाय का घी अर्पित करने से व्यक्ति निरोगी और स्वस्थ रहता है।

साधक को जीवन में स्थिरता, आत्मबल और सफलता मिलती है।

मां शैलपुत्री की पूजा से भय, चिंता और असुरक्षा दूर होती है।

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करके भक्त अपने साधना पथ की शुरुआत करते हैं।

यह आरंभिक साधना व्यक्ति के जीवन में नई ऊर्जा का संचार करती है और उसे आत्मविश्वास एवं आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है।


शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं

शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

डॉ. ए. के. पाण्डेय


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