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क्या है फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम? जानें इसके कारण और प्रभाव

फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम एक ऐसा अनुभव है जिसमें लोग बिना फोन के कंपन महसूस करते हैं। यह अनुभव इतना वास्तविक होता है कि लोग इसे सच मान लेते हैं। विभिन्न अध्ययनों में यह पाया गया है कि यह अनुभव अधिकतर फोन के उपयोग से जुड़ा होता है। जानें इसके कारण, लक्षण और इससे निपटने के उपाय। क्या यह मानसिक बीमारी का संकेत है? क्या तनाव और नींद की कमी इसका कारण हो सकते हैं? इस लेख में हम इन सभी सवालों का उत्तर देंगे।
 

फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम: एक परिचय

Phantom Vibration Syndrome

Phantom Vibration Syndrome

फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम: कभी-कभी ऐसा होता है कि जब आपका फोन जेब में होता है, तो आपको लगता है कि वह वाइब्रेट हुआ है। आप तुरंत उसे चेक करते हैं, लेकिन कोई कॉल, संदेश या नोटिफिकेशन नहीं होता। कभी-कभी तो ऐसा भी लगता है कि फोन की घंटी या डोरबेल बजी है, जबकि वास्तव में ऐसा कुछ नहीं हुआ। यह अनुभव इतना वास्तविक होता है कि हमें संदेह नहीं होता कि शायद यह हमारे दिमाग का भ्रम है।


फैंटम वाइब्रेशन का अनुभव करने वाले लोग

इस अनुभव की व्यापकता पर विभिन्न अध्ययनों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। 2010 में अमेरिका के एक अस्पताल में किए गए अध्ययन में लगभग 70 प्रतिशत लोगों ने कभी न कभी फैंटम वाइब्रेशन का अनुभव किया। हालांकि, केवल 2 प्रतिशत लोगों ने इसे बहुत परेशान करने वाला बताया। यह अध्ययन यह भी दर्शाता है कि जो लोग फोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का अधिक उपयोग करते हैं, उनमें यह अनुभव अधिक सामान्य है।


फैंटम वाइब्रेशन का कारण

इसका कारण हमारे दिमाग का कार्य करने का तरीका है। जब फोन वाइब्रेट करता है, तो उसकी हलचल हमारी त्वचा तक पहुंचती है। त्वचा में मौजूद रिसेप्टर्स इस कंपन को महसूस करते हैं और तंत्रिकाओं के माध्यम से दिमाग तक जानकारी पहुंचाते हैं। लेकिन दिमाग केवल संकेतों का इंतजार नहीं करता, वह पहले से अनुमान लगाता है कि अगले पल क्या होने वाला है।


दिमाग का संकेतों का अर्थ निकालना

हम अक्सर सोचते हैं कि इंद्रियों से संकेत दिमाग तक पहुंचते हैं और फिर वह उन्हें पहचानता है। असल में, दिमाग पुराने अनुभवों और मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर संकेतों का अर्थ निकालता है। उदाहरण के लिए, अगर आप किसी दोस्त का इंतजार कर रहे हैं और दूर से कोई आकृति दिखाई देती है, तो आपको लग सकता है कि वह आपका दोस्त है। इसी तरह, फोन की घंटी का इंतजार करते समय, आसपास की हल्की आवाजें फोन की घंटी जैसी लग सकती हैं।


क्या फैंटम वाइब्रेशन का संबंध फोन के उपयोग से है?

कई अध्ययनों में फोन के उपयोग और फैंटम वाइब्रेशन के बीच संबंध पाया गया है। 2018 में एक अध्ययन में 60 प्रतिशत लोगों ने फैंटम वाइब्रेशन का अनुभव किया। यह अनुभव अधिक फोन उपयोग और वाइब्रेशन मोड में रखने की आदत से जुड़ा पाया गया।


तनाव और नींद की कमी का प्रभाव

तनाव के समय, हमारा दिमाग अधिक सतर्क हो सकता है और आसपास के संकेतों पर ध्यान देता है। हालांकि, शोध से यह साबित नहीं हुआ है कि फैंटम वाइब्रेशन का मतलब चिंता या तनाव की बीमारी है। नींद की कमी भी संकेतों की व्याख्या को प्रभावित कर सकती है।


क्या यह फोन की लत का संकेत है?

फैंटम वाइब्रेशन और फोन के अधिक उपयोग के बीच संबंध पाया गया है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि यह फोन की लत का संकेत हो। असल में, यह दिमाग के अनुभवों का परिणाम हो सकता है।


क्या फैंटम वाइब्रेशन हैलुसिनेशन है?

वैज्ञानिक साहित्य में इसे कभी-कभी स्पर्श से जुड़ी अनुभूति के रूप में वर्णित किया जाता है। लेकिन यह मानसिक बीमारी का प्रमाण नहीं है।


क्या फोन को दूर रखने से फर्क पड़ सकता है?

अगर यह अनुभव परेशान कर रहा है, तो फोन को शरीर से दूर रखना मददगार हो सकता है। फोन को बैग में रखना या गैरजरूरी नोटिफिकेशन बंद करना उपयोगी हो सकता है।


कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

अगर बिना किसी बाहरी कारण के लगातार आवाजें सुनाई देने लगें या कंपन महसूस हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।


फैंटम वाइब्रेशन का असली कारण

फैंटम वाइब्रेशन हमें यह समझने का मौका देता है कि हमारा दिमाग दुनिया को कैसे समझता है। कभी-कभी, हल्की आवाजें या संवेदनाएं हमारे दिमाग में फोन के कंपन के रूप में बदल जाती हैं।


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