क्या है पोस्टपार्टम साइकोसिस? जानें इसके लक्षण और उपचार के तरीके
पोस्टपार्टम साइकोसिस के लक्षण
पोस्टपार्टम साइकोसिस के लक्षण
पोस्टपार्टम साइकोसिस के लक्षणपोस्टपार्टम साइकोसिस के लक्षण: जब कोई नई मां बच्चे के जन्म के कुछ दिनों या हफ्तों बाद अजीब व्यवहार करने लगे, अपने बच्चे को पहचानने से इनकार करे, या ऐसी बातें करे जो वास्तविकता से पूरी तरह अलग हों, तो परिवार में पहला ख्याल यही आता है कि शायद किसी बुरी नजर का असर है।
हालांकि, यह एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या हो सकती है, जिसे चिकित्सा में 'पोस्टपार्टम साइकोसिस' कहा जाता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, लेकिन इसके प्रति जागरूकता की कमी क्यों है, और इसे अंधविश्वास के रूप में क्यों देखा जाता है? आइए इसे समझते हैं।
पोस्टपार्टम साइकोसिस क्या है?
पोस्टपार्टम साइकोसिस एक गंभीर मानसिक स्थिति है, जो आमतौर पर डिलीवरी के दो हफ्तों के भीतर शुरू होती है, लेकिन यह चार हफ्तों तक भी हो सकती है। इस स्थिति में महिला की सोच वास्तविकता से कट जाती है, जिससे उसे भ्रम (डिल्यूजन) या मतिभ्रम (हैलुसिनेशन) होने लगते हैं। मूड में तेजी से उतार-चढ़ाव होता है, और कन्फ्यूजन बढ़ता है। यह स्थिति हर एक हजार डिलीवरी में से एक से दो मामलों में होती है, लेकिन इसकी गंभीरता इसे एक मेडिकल इमरजेंसी बनाती है।
इसका कारण क्या है?
पोस्टपार्टम साइकोसिस का मुख्य कारण बाइपोलर डिसऑर्डर या स्किजोअफेक्टिव डिसऑर्डर का पारिवारिक इतिहास माना जाता है। जिन महिलाओं को पहले से बाइपोलर डिसऑर्डर का अनुभव रहा है, उनमें से आधी महिलाओं में डिलीवरी के बाद इसके दोबारा उभरने का खतरा होता है। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं, जिन्हें यह समस्या होती है, उनका पहले कभी मानसिक बीमारी का इतिहास नहीं होता। हार्मोनल बदलाव, नींद की कमी, और प्रसव के दौरान शारीरिक आघात भी इसके कारण हो सकते हैं।
लक्षणों की पहचान कैसे करें?
पोस्टपार्टम साइकोसिस के लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और तेजी से बढ़ते हैं। शुरुआत में नींद न आना, बेचैनी और चिड़चिड़ापन दिखाई देता है, इसके बाद मूड में उतार-चढ़ाव और मनोविकार के लक्षण सामने आते हैं। कभी-कभी इसमें बच्चे को लेकर डरावने भ्रम भी शामिल हो सकते हैं।
इसका खतरा
यह स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि पोस्टपार्टम साइकोसिस में मां या बच्चे को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी है। अगर कोई नई मां असामान्य व्यवहार दिखाए, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
इसकी छिपाने की वजहें
इस गंभीर स्थिति के बावजूद, इसके प्रति जागरूकता की कमी है। समाज में मां बनने को खुशी और पूर्णता से जोड़ा जाता है, जिससे महिलाएं अपने लक्षणों को छिपाने की कोशिश करती हैं। इसके अलावा, कई महिलाएं खुद को बीमार मानने से इनकार कर देती हैं।
परिवार और समाज की भूमिका
अगर किसी नई मां में ऐसे लक्षण दिखें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। यह स्थिति टालने वाली नहीं है। महिला को दोष न दें, क्योंकि यह एक अनैच्छिक मेडिकल स्थिति है। झाड़-फूंक या तांत्रिक इलाज पर समय बर्बाद न करें। बच्चे की सुरक्षा का ध्यान रखें और परिवार के अन्य सदस्य उसकी देखभाल में मदद करें।
एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी
पोस्टपार्टम साइकोसिस एक गंभीर और इलाज योग्य मेडिकल इमरजेंसी है। सही समय पर पहचान और इलाज मिलने पर महिला पूरी तरह ठीक हो सकती है। इसलिए, इस विषय पर खुलकर बात करना और असामान्य व्यवहार को मेडिकल नजरिए से देखना आवश्यक है।
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