क्या हैं आँखों के सामने तैरते काले धब्बे? जानें इसके कारण और संकेत
आँखों के सामने तैरते धब्बे: क्या हैं ये?
Why do Black Spots Float in Front of Eyes| When are Eye Floaters Dangerous
आई फ्लोटर्स के कारण: जब हम नीले आसमान या सफेद दीवार को देखते हैं, तो आँखों के सामने छोटे काले धब्बे, धागे या मकड़ी के जाले जैसी आकृतियाँ तैरती हुई दिखाई देती हैं। ये धब्बे आँखों को घुमाने पर इधर-उधर खिसकते हैं और इन्हें सीधे देखने की कोशिश करने पर ये हट जाते हैं। कुछ समय बाद ये फिर से दिखाई देने लगते हैं।
चिकित्सा विज्ञान में इन धब्बों को 'आई फ्लोटर्स' या 'विट्रियस फ्लोटर्स' कहा जाता है। ये सामान्यतः उम्र बढ़ने के कारण आँखों में होने वाले बदलावों के कारण होते हैं। हालाँकि, कभी-कभी ये रेटिना में छेद या फटाव, आँख के भीतर खून बहने या रेटिना के अपनी जगह से अलग होने जैसी गंभीर समस्याओं का संकेत भी हो सकते हैं।
अमेरिकी नेशनल आई इंस्टीट्यूट के अनुसार, अधिकांश फ्लोटर्स के लिए उपचार की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन यदि अचानक बहुत सारे नए धब्बे दिखाई दें, आँखों के सामने बिजली चमकने जैसी रोशनी दिखे या दृष्टि के किसी हिस्से पर काला पर्दा आ जाए, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जाँच करानी चाहिए।
आँखों के सामने तैरने वाले धब्बे क्या होते हैं?
आई फ्लोटर्स छोटी आकृतियाँ होती हैं, जो आँखों के सामने तैरती हुई दिखाई देती हैं। ये काले या भूरे बिंदुओं, घुमावदार रेखाओं, धागों, पारदर्शी छल्लों या मकड़ी के जाले जैसी दिख सकती हैं। कुछ लोगों को ये कभी-कभी दिखाई देती हैं, जबकि कुछ को रोज नजर आती हैं। ये वास्तव में आँखों के सामने नहीं होतीं, बल्कि आँख के भीतर मौजूद एक पारदर्शी पदार्थ से संबंधित होती हैं।
आँख के भीतर एक पारदर्शी, जैल जैसा पदार्थ होता है जिसे 'विट्रियस ह्यूमर' कहा जाता है। यह आँख के बड़े हिस्से में मौजूद रहता है और उसकी संरचना बनाए रखने में मदद करता है। इसमें पानी के साथ कोलेजन नामक प्रोटीन के महीन रेशे और अन्य पदार्थ होते हैं।
कम उम्र में यह जैल आमतौर पर साफ रहता है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ इसके भीतर मौजूद कुछ रेशे आपस में इकट्ठे होने लगते हैं। जब रोशनी आँख के भीतर प्रवेश करती है, तो ये छोटे गुच्छे रेटिना पर छाया डालते हैं, जिससे मस्तिष्क इन्हें काले धब्बे के रूप में महसूस करता है।
फ्लोटर्स की पहचान कैसे करें?
फ्लोटर्स की पहचान करना आसान है। जब कोई व्यक्ति किसी धब्बे को सीधे देखने की कोशिश करता है, तो वह अक्सर अपनी जगह से खिसक जाता है। इसका कारण यह है कि फ्लोटर्स आँख के भीतर मौजूद जैल में होते हैं। आँख घुमाने पर जैल और उसमें मौजूद छोटे कण भी हिल सकते हैं।
सफेद दीवार या नीले आसमान पर फ्लोटर्स ज्यादा स्पष्ट दिखाई देते हैं। इसका कारण यह है कि जब हम एकसार और उजली सतह को देखते हैं, तो रेटिना पर लगभग एक जैसी रोशनी पड़ती है। ऐसे में विट्रियस के छोटे गुच्छों की छाया उजले हिस्से से अलग दिखाई देती है।
क्या फ्लोटर्स का मतलब रेटिना की समस्या है?
ज्यादातर मामलों में फ्लोटर्स का मतलब यह नहीं होता कि रेटिना खराब हो रही है। लेकिन अगर अचानक बहुत सारे नए धब्बे दिखाई दें और साथ में बिजली चमकने जैसी रोशनी भी नजर आए, तो यह रेटिना की समस्या का संकेत हो सकता है।
रेटिना में फटाव होने पर आँखों की रोशनी को खतरा हो सकता है। इसलिए यदि आँखों के सामने काला पर्दा आने का अनुभव हो, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जाँच कराना चाहिए।
फ्लोटर्स का इलाज कैसे किया जाता है?
कुछ मामलों में फ्लोटर्स को कम करने के लिए लेजर का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया को 'YAG लेजर विट्रियोलाइसिस' कहते हैं। लेकिन यह हर तरह के फ्लोटर्स के लिए सही नहीं है। इसके अलावा, कुछ गंभीर मामलों में डॉक्टर 'विट्रेक्टॉमी' नाम की सर्जरी कर सकते हैं, जिसमें आँख के भीतर मौजूद विट्रियस का ज्यादातर हिस्सा निकाल दिया जाता है।
हालांकि, यह प्रक्रिया मामूली नहीं है और इसके अपने जोखिम होते हैं। इसलिए सर्जरी का निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करना आवश्यक है।
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