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टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में नया मोड़: आरोपी ने नाबालिग होने का दावा किया!

टाइगर श्रॉफ के फायरिंग मामले में एक नया मोड़ आया है जब मुख्य आरोपी फूल सिंह ने अदालत में नाबालिग होने का दावा किया। मकोका कोर्ट ने उसकी उम्र की जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच ने गैंग के वित्तीय नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसमें स्थानीय ऑटो-रिक्शा चालकों और दुकानदारों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। जानें इस मामले में और क्या जानकारी सामने आई है।
 

टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में अदालती सुनवाई




मुंबई, 6 नवंबर। अभिनेता टाइगर श्रॉफ के फायरिंग मामले में एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। सभी आरोपियों को मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून) कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान मुख्य आरोपी फूल सिंह ने अदालत में एक याचिका दायर कर कहा कि वह नाबालिग है।


फूल सिंह ने कोर्ट में कहा कि उसे अपने वकील से बात करने का मौका नहीं मिला, जिसके कारण वह अपनी उम्र के बारे में जानकारी नहीं दे सका। अदालत ने उसकी उम्र की जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश की जाए। वहीं, आरोपी नंबर 1, 2, 6, 7 और 8 को 11 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि अन्य सात आरोपियों को न्यायिक हिरासत में रखा गया है।


इस मामले की सुनवाई एक विशेष मकोका कोर्ट कर रही है, जिसने पहले भी आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेजा था।


टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर हुई फायरिंग की जांच कर रही मुंबई क्राइम ब्रांच को गैंग के वित्तीय नेटवर्क से संबंधित एक चौंकाने वाला तथ्य मिला है। जांच में पता चला है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने मुंबई में शूटरों तक पैसे पहुंचाने के लिए स्थानीय ऑटो-रिक्शा चालकों और छोटे दुकानदारों के बैंक खातों का उपयोग किया।


कमीशन का लालच देकर उनके यूपीआई क्यूआर कोड लिए जाते थे और फिर हरियाणा से इन खातों में पैसे ट्रांसफर किए जाते थे। इस पूरे नेटवर्क के माध्यम से गैंग ने अपनी गतिविधियों को छिपाने और जांच एजेंसियों को गुमराह करने की कोशिश की।


मुंबई क्राइम ब्रांच के अनुसार, इस मनी ट्रेल में विदेश में बैठे गैंग के मुख्य गुर्गे अनिल पंडित का नाम सामने आया है। आरोप है कि अनिल पंडित मुंबई में मौजूद शूटरों फूल सिंह, रेहान और ऋतिक को लगातार निर्देश देता था। उसके कहने पर शूटर स्थानीय रिक्शा चालकों और दुकानदारों से संपर्क करते थे और उन्हें खाते में पैसे मंगवाने के बदले कमीशन देने का लालच देते थे।


जांच में यह भी सामने आया कि शूटर पहले रिक्शा चालकों और दुकानदारों से उनके यूपीआई क्यूआर कोड हासिल करते थे। इसके बाद इन कोड की तस्वीरें अनिल पंडित को भेजी जाती थीं। अनिल इन्हें अपने छोटे भाई अभिषेक पंडित तक पहुंचाता था। आरोप है कि अभिषेक के निर्देश पर उसकी पत्नी सुनेहा पंडित हरियाणा के करनाल से इन क्यूआर कोड को स्कैन कर रकम ट्रांसफर करती थी। इसके बाद मुंबई में मौजूद शूटर संबंधित व्यक्ति को कमीशन देकर बाकी रकम कैश ले लेते थे.


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