क्या है सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति? जानें 50 ओटीटी ऐप्स पर क्यों लगी रोक!
सरकार की कार्रवाई पर एक नजर
नई दिल्ली, 22 जुलाई। केंद्र सरकार ने पिछले दो वर्षों में अश्लील सामग्री के प्रसारण और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के उल्लंघन के चलते भारत में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म की पहुंच पर रोक लगा दी है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से साझा की।
उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई उन इंटरमीडियरी और ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ की गई है, जो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 67 और 67ए, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 294 और इंडिसेंट रिप्रेजेंटेशन ऑफ वीमेन (प्रोहिबिशन) एक्ट, 1986 की धारा 4 का उल्लंघन कर रहे थे।
वैष्णव ने कहा कि पिछले दो वर्षों में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म की सार्वजनिक पहुंच पर रोक लगाई गई है, क्योंकि इन पर अश्लील सामग्री का प्रसारण हो रहा था और कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया गया था।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करती है और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(बी) के तहत इंटरमीडियरी को अवैध सामग्री हटाने या उस तक पहुंच को प्रतिबंधित करने के निर्देश देती है।
मंत्री ने कहा कि सरकार की डिजिटल नीति का उद्देश्य सभी उपयोगकर्ताओं, विशेषकर बच्चों के लिए एक सुरक्षित और विश्वसनीय इंटरनेट वातावरण सुनिश्चित करना है।
उन्होंने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 डिजिटल नवाचार, उपयोगकर्ता सुरक्षा और जिम्मेदार ऑनलाइन भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करते हैं।
आईटी नियमों के तहत इंटरमीडियरी के लिए यह आवश्यक है कि वे उचित सावधानी बरतें और अपने उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट रूप से सूचित करें कि वे ऐसी किसी सामग्री को होस्ट, अपलोड, प्रकाशित, प्रसारित या साझा न करें, जो बच्चों के लिए हानिकारक हो या किसी लागू कानून का उल्लंघन करती हो।
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