इंदीवर: हिंदी सिनेमा के अमर गीतकार की कहानी, जिन्होंने दिलों को छुआ
इंदीवर का अद्भुत सफर
नई दिल्ली, 26 फरवरी। श्यामलाल बाबू राय, जिन्हें इंदीवर के नाम से जाना जाता है, हिंदी सिनेमा के उन महान गीतकारों में से एक हैं, जिनके गीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। उन्होंने अपने अद्भुत गीतों के माध्यम से लाखों लोगों को छुआ है। चार दशकों के अपने करियर में, उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों के लिए एक हजार से ज्यादा गीत लिखे हैं।
इंदीवर के गीतों में सरलता, गहराई और जीवन की सच्चाई का अद्भुत मेल है, जो आज भी ताजगी से गूंजते हैं। उनकी रचनाएँ केवल संगीत नहीं, बल्कि भावनाओं का अमर संग्रह हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण रहेंगी। उनकी पुण्यतिथि 27 फरवरी को मनाई जाती है।
इंदीवर का जन्म उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के बरुआ सागर कस्बे में हुआ। बचपन से ही उन्हें कविता और गीत लेखन में रुचि थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, उन्होंने कई देशभक्ति गीत लिखे। विवाह के बाद, वे मुंबई आए और संघर्ष के दिनों से गुजरे। 1946 में, उन्होंने फिल्म 'डबल फेस' के लिए अपना पहला गीत लिखा, लेकिन वह फिल्म सफल नहीं हुई। उनकी असली पहचान 1951 में फिल्म 'मल्हार' से मिली, जहां उनका गीत 'बड़े अरमानों से रखा है बलम तेरी कसम' सुपरहिट हुआ।
1963 में, बाबूभाई मिस्त्री की फिल्म 'पारस मणि' में उनका गीत 'ओ नाजुक हो, नाज से भी तुम प्यार से भी प्यारी' काफी लोकप्रिय हुआ। इसके बाद, इंदीवर का सफर लगातार जारी रहा।
इंदीवर की सबसे सफल जोड़ी संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी के साथ बनी। मनोज कुमार की फिल्मों 'उपकार' और 'पूरब और पश्चिम' में उनके गीतों ने देशभक्ति और सामाजिक संदेश को खूबसूरती से प्रस्तुत किया। 'अभी तुमको मेरी जरूरत नहीं' जैसे गीत आज भी सुनने वालों को भावुक कर देते हैं। राकेश रोशन की फिल्मों में भी इंदीवर ने शानदार काम किया।
उत्तम कुमार और शर्मिला टैगोर की फिल्म 'अमानुष' में 'दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा' गीत के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। इंदीवर ने पॉप सिंगर नाजिया हसन और जोहैब हसन के लिए भी गीत लिखे, जिनमें 'आप जैसा कोई', 'बूम बूम', और 'चंदन सा बदन' शामिल हैं।
इंदीवर ने 'दिल ने पुकारा', 'सरस्वती चंद्र', 'यादगार', 'सफर', 'सच्चा झूठा', 'जॉनी मेरा नाम', 'धर्मात्मा', 'हेरा फेरी', 'डॉन', 'कुर्बानी', 'कलाकार' जैसी दर्जनों फिल्मों में अमर गीत दिए। उनके शब्दों में सरलता और गहराई का अनोखा मेल था।
27 फरवरी 1997 को इंदीवर का निधन हो गया, लेकिन उनके गीत आज भी जीवित हैं।
.png)