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पिल्ले चले परिंदों की राह, खुद अपनी चाल भूल गए

जयपुर। कहा जाता है कि पूत के पग पालने में ही दिख जाते हैं। यही बात इस नवजात संकर चूजे पर भी लागू होती है। इसने अंडे से बाहर निकलते ही अपने तल्ख तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। लेकिन इसे पता नहीं है कि इस तरह अपने बाप की गुर्राने से यह कभी भी
 
पिल्ले चले परिंदों की राह, खुद अपनी चाल भूल गए

जयपुर। कहा जाता है कि पूत के पग पालने में ही दिख जाते हैं। यही बात इस नवजात संकर चूजे पर भी लागू होती है। इसने अंडे से बाहर निकलते ही अपने तल्ख तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। लेकिन इसे पता नहीं है कि इस तरह अपने बाप की गुर्राने से यह कभी भी एक लाय़क मुर्गा नहीं बन पाएगा।पिल्ले चले परिंदों की राह, खुद अपनी चाल भूल गए

इस मैनारूपी डॉगी को अपना पिछला जन्म का सब कुछ याद है। तभी तो गली के आवारा कुत्ते की तरह इस मासूम गिलहरी के दिल में खौफ पैदा करने की टुच्ची कोशिश कर रहा है। लेकिन यह भूल गया है कि अब इसका शरीर केवल 4 इंच का है।पिल्ले चले परिंदों की राह, खुद अपनी चाल भूल गए

वही यह शांत बैठा टॉमी अपने पुराने दिनों की मीठी यादों में खोया हुआ है। तभी तो ख्यालों में भी इसके गले में वही पट्टा रहता है, जो कभी इसकी पहचान हुआ करता था। परंतु अब यह परिंदों की तरह एक डाल से दूसरी डाल पर फुदकता रहता है।पिल्ले चले परिंदों की राह, खुद अपनी चाल भूल गए

वही यह नई नवेली दुल्हन अपनी सेज पर बैठी हुई पिया जी का इंतजार कर रही है। कब पिल्ले जी आएंगे और इसे हड़्डी वाला तिनका खिलाएंगे। आंखों में सजन की आस लिए यह कब से उदास बैठी है।पिल्ले चले परिंदों की राह, खुद अपनी चाल भूल गए

वही यह जनाब तो अलग ही दुनिया में मस्त है। इन्हें दीन दुनिया से कोई लेना देना नहीं है। इनका बस एक ही काम है, जीभ को लटकाए हुए बाहर की ताजा हवा अंदर लेना।

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