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यामी गौतम ने साझा किया थिएटर के दिनों का मजेदार किस्सा, हंसते-हंसते लोटपोट हुए लोग!

यामी गौतम ने हाल ही में अपनी फिल्म 'हक' की सफलता का जश्न मनाते हुए अपने थिएटर के दिनों का एक मजेदार किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे एक डायलॉग को अजीब तरीके से बोलने पर सभी लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो गए। इसके अलावा, यामी ने निर्देशक और अभिनेता के बीच की रचनात्मक साझेदारी पर भी अपने विचार साझा किए। जानें और क्या कहा यामी ने इस दिलचस्प बातचीत में!
 
यामी गौतम ने साझा किया थिएटर के दिनों का मजेदार किस्सा, हंसते-हंसते लोटपोट हुए लोग!

यामी गौतम का थिएटर अनुभव


मुंबई, 1 जनवरी। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री यामी गौतम हाल ही में अपनी नई फिल्म 'हक' की सफलता का जश्न मना रही हैं। इस अवसर पर, उन्होंने अपने शुरुआती थिएटर अनुभव को साझा किया, जिसमें एक मजेदार घटना का जिक्र किया। यामी ने बताया कि एक बार उन्होंने एक डायलॉग इस तरह बोला कि वहां मौजूद सभी लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो गए।


यामी ने कहा, ''जब मैं स्कूल में थिएटर की क्लास ले रही थी, तब एक नए शिक्षक आए थे। उस समय थिएटर की शुरुआत हो रही थी और हर छात्र को अपनी लाइन को अलग अंदाज में बोलना था। मुझे याद है कि मेरा एक डायलॉग था, 'चुप रहो, छोटे शैतान, वरना मैं तुम्हारा गला काट दूंगी', जिसे मैंने इतनी अजीब तरीके से कहा कि सभी लोग हंसने लगे।''


उन्होंने आगे बताया, ''टीचर ने मजाक में कहा कि 'तुम तो किसी गली के आदमी की तरह बोल रही हो', मैंने जवाब दिया, 'मुझे नहीं पता मैं कैसे करूं, लेकिन कम से कम आपको मेरी लाइनें याद हैं।'''


यामी ने अभिनय और निर्देशक के बीच के संबंध पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, ''निर्देशक कहानी की दिशा निर्धारित करते हैं, और अभिनेता उनके विजन को पर्दे पर जीवंत करते हैं। एक ही किरदार को कई तरीके से निभाया जा सकता है, और इनमें से कोई भी तरीका गलत नहीं होता। लेकिन जो कुछ भी स्क्रीन पर दिखता है, वह हमेशा निर्देशक के दृष्टिकोण का हिस्सा होता है। यह कलाकार और निर्देशक के बीच की रचनात्मक साझेदारी को दर्शाता है।''


उन्होंने कहा, ''अभिनय केवल डायलॉग बोलने तक सीमित नहीं है। यह किरदार की भावनाओं और मानसिकता को समझने का एक तरीका है। जब निर्देशक सही दिशा में मार्गदर्शन करते हैं, तो अभिनेता को अपनी प्रतिभा का उपयोग करके कहानी को और भी प्रभावशाली बनाना होता है। निर्देशक और अभिनेता का तालमेल ही किसी फिल्म की सफलता की कुंजी है।''


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