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सतीश कौल: पंजाबी सिनेमा के अमिताभ बच्चन का संघर्ष और विरासत

सतीश कौल, जिन्हें 'पंजाबी सिनेमा का अमिताभ बच्चन' कहा जाता था, ने अपने करियर में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया। उनकी पहचान बीआर चोपड़ा की 'महाभारत' में इंद्रदेव के किरदार से बनी। हालांकि, जीवन के अंतिम वर्षों में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस लेख में उनके संघर्ष, सफलता और विरासत पर चर्चा की गई है।
 

सतीश कौल का अद्वितीय सफर

मुंबई, 7 सितंबर। सतीश कौल एक ऐसे अभिनेता रहे हैं, जिन्होंने फिल्म और टेलीविजन दोनों में अपनी खास पहचान बनाई। पंजाबी सिनेमा में उनका नाम एक समय ऐसा था कि दर्शक उन्हें 'पंजाबी सिनेमा का अमिताभ बच्चन' मानते थे। बीआर चोपड़ा की 'महाभारत' में इंद्रदेव का किरदार निभाकर उन्होंने देशभर में अपनी पहचान बनाई। हालांकि, उनके जीवन में शोहरत के साथ-साथ कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा।


हालांकि, उनके जीवन के कठिन समय में भी अभिनय का जुनून कम नहीं हुआ। उन्होंने एक बार कहा था कि उनके अंदर एक्टिंग की आग अभी भी जल रही है और वह किसी भी भूमिका के लिए तैयार हैं।


सतीश कौल का जन्म 8 सितंबर 1946 को कश्मीर में हुआ। बचपन से ही उन्हें अभिनय का शौक था, जिसके चलते उन्होंने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) में पढ़ाई की। वहां से प्रशिक्षण लेने के बाद, उन्होंने पंजाबी सिनेमा में कदम रखा और जल्द ही बड़े सितारों में शामिल हो गए।


अपने करियर में सतीश कौल ने लगभग 300 हिंदी और पंजाबी फिल्मों में काम किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में 'सस्सी पुन्नू', 'इश्क निमाना', 'सुहाग चूड़ा', 'पटोला', 'आजादी', 'शेरा दे पुत्त शेर', 'मौला जट्ट' और 'पींगा प्यार दीयां' शामिल हैं।


पंजाबी सिनेमा में सफलता के बाद, उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी काम किया, जिसमें 'कर्मा', 'वारंट', 'आग ही आग', 'कमांडो', 'राम लखन' और 'प्यार तो होना ही था' जैसी फिल्में शामिल हैं। हालांकि, हिंदी सिनेमा में उन्हें उतनी सफलता नहीं मिली।


सतीश कौल की पहचान बी.आर. चोपड़ा की 'महाभारत' से बनी, जिसमें उन्होंने इंद्रदेव का किरदार निभाया। इस शो ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। इसके अलावा, उन्होंने 'विक्रम और बेताल' जैसे लोकप्रिय टीवी शो में भी काम किया।


कामयाबी के बाद, सतीश कौल ने 2011 में एक एक्टिंग स्कूल खोला, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं रहा और स्कूल बंद हो गया। इसके बाद उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी।


2015 में एक गंभीर दुर्घटना में उनका हिप बोन टूट गया, जिसके कारण वह लगभग ढाई साल तक बिस्तर पर रहे। 2019 में, उन्होंने वृद्धाश्रम से बाहर आकर किराए के घर में रहने का निर्णय लिया।


मई 2020 में, उन्होंने अपनी आर्थिक परेशानियों के बारे में खुलकर बात की और फिल्म इंडस्ट्री से मदद की अपील की। इसके बावजूद, उनका अभिनय का जुनून बरकरार रहा।


सतीश कौल को 2011 में पीटीसी पंजाबी फिल्म अवॉर्ड्स में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।


उनका निधन 10 अप्रैल 2021 को लुधियाना में कोविड-19 से संबंधित जटिलताओं के कारण हुआ। वह 74 वर्ष के थे।


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