लिसा रे ने साझा किया घर का नया मतलब: क्या है उनकी परिभाषा?
लिसा रे का नया दृष्टिकोण
मुंबई, 17 अगस्त। अभिनेत्री लिसा रे ने हाल ही में अपने जीवन के एक महत्वपूर्ण पहलू पर चर्चा की है, जिससे कई लोग खुद को जोड़ पाएंगे। उन्होंने बताया कि विभिन्न शहरों, देशों और महाद्वीपों में रहने के अनुभव ने उनके लिए 'घर' की परिभाषा को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जिस स्थान को स्थायी ठिकाना माना जाता था, अब उनके लिए वह किसी एक पते या चार दीवारों से नहीं जुड़ा है। उनके अनुसार, घर वह स्थान है, जहां व्यक्ति बिना किसी डर या संकोच के अपने असली रूप में रह सके। उनकी बेटियों की उपस्थिति भी इस एहसास को और खास बनाती है।
लिसा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा करते हुए घर, अपनापन और सुरक्षा के बारे में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने लिखा, 'लोगों ने हमेशा मुझसे कहा कि एक स्थायी ठिकाना होना चाहिए। यह माना जाता है कि एक जगह से जुड़कर रहने से जीवन में स्थिरता आती है। लेकिन मेरा अनुभव इससे भिन्न रहा है। मैंने 16 साल की उम्र से यात्रा करना शुरू किया था। समय के साथ, मुझे विभिन्न स्थानों को करीब से अनुभव करने की आदत हो गई।'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं दुनिया को केवल तस्वीरों में कैद करने के बजाय उसे जीना पसंद करती हूं। विभिन्न स्थानों पर जाना, वहां के माहौल को समझना और कुछ समय के लिए उस स्थान का हिस्सा बनना मेरी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा रहा है। शायद यही कारण है कि मैंने इतनी जगहें देखी हैं, फिर भी मेरे पास यात्राओं की ज्यादा तस्वीरें नहीं हैं। मैंने कई स्थानों पर समय बिताया, जो पहली नजर में ही घर जैसी लगीं। इसके विपरीत, कुछ ऐसे घर भी रहे, जहां रहने के बावजूद मुझे हमेशा अस्थायी महसूस हुआ।'
लिसा ने कहा, 'किसी स्थान से जुड़ाव का संबंध इस बात से नहीं है कि वहां आपका सामान या फर्नीचर है। मेरे लिए घर की असली परिभाषा वह जगह है, जहां मैं सबसे अधिक सहज महसूस करूं। ऐसी जगह, जहां मुझे यह सोचने की जरूरत न पड़े कि मुझे क्या कहना है या कैसे व्यवहार करना है। घर मेरे लिए वह स्थान या व्यक्ति हो सकता है, जो मेरे व्यक्तित्व के हर बदलते रूप को खुले दिल से स्वीकार करे।'
उन्होंने आगे कहा, 'इतने वर्षों तक स्थान बदलने के बाद, अब मेरे लिए सुरक्षित महसूस करना असली लग्जरी बन गया है। आज के समय में घर का मतलब कई चीजें हो सकता है। कभी कोई व्यक्ति घर जैसा लगता है, तो कभी किसी अनजान शहर की जानी-पहचानी सड़क। कभी खाना पकने की खुशबू घर जैसा एहसास दे सकती है और कभी बिस्तर के पास रखी किताब भी वही सुकून दे सकती है।'
लिसा ने अपनी बेटियों का भी उल्लेख किया, कहती हैं, 'जब मेरी बेटियां मेरे पास होती हैं, तो वह एहसास भी मेरे लिए घर जैसा होता है। जिंदगी के वो खास पल, जब मेरे भीतर का शोर अचानक शांत हो जाता है और मुझे लगता है कि दुनिया बिल्कुल उसी जगह है, जहां उसे होना चाहिए, मेरे लिए घर की तरह हैं।'
जब उनसे पूछा गया कि वह कहां से हैं, तो उन्होंने कहा, 'यह सवाल मेरे लिए आसान नहीं होता। मैं कई जगहों से बनी हूं, और मेरी जिंदगी पर उससे भी ज्यादा जगहों का असर रहा है। हालांकि, आज गोवा मुझे अपना घर महसूस होता है। ऐसा इसलिए नहीं है कि मैंने घूमना या जगहें बदलना बंद कर दिया है, बल्कि इसलिए कि गोवा में मुझे पहली बार ऐसा महसूस होता है कि मुझे हर वक्त आगे बढ़ते रहने की जरूरत नहीं है।'
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