योगेश की कहानी: एक गिलास पानी ने कैसे बदल दी दोस्ती की परिभाषा?
योगेश का अनोखा किस्सा
मुंबई, 18 मार्च। पुरानी फिल्मों, गानों और किस्सों की बात करें तो आज भी ये दर्शकों के दिलों में बसे हुए हैं। जब बात किसी प्रिय कलाकार की जिंदगी से जुड़ी हो, तो लोग और भी ज्यादा जानने के लिए उत्सुक रहते हैं। गीतकार योगेश, जिन्होंने सिनेमा को कई यादगार गाने दिए हैं, से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा उनके सिद्धांतों को उजागर करता है।
योगेश ने 'जिंदगी कैसी है पहेली', 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए' और 'रजनीगंधा फूल तुम्हारे' जैसे अमर गीतों की रचना की। उनका जन्म 19 मार्च 1943 को लखनऊ में हुआ। उनका मानना था कि गीत जीवन के अनुभवों से ही उत्पन्न होते हैं। वह अक्सर कहते थे, 'जो देखा, जो जिया, वो ही लिख दिया'। उनकी सरलता और ईमानदारी ने उनके शब्दों को लोगों के दिलों तक पहुंचाया।
योगेश ने अपने करियर की शुरुआत 1962 में फिल्म 'सखी रॉबिन' से की, जिसमें उन्होंने छह गाने लिखे, जिनमें 'तुम जो आ गए' भी शामिल था। इस फिल्म ने उन्हें पहचान दिलाई, लेकिन एक घटना ने उनके जीवन में खटास ला दी।
एक इंटरव्यू में योगेश ने बताया कि 'सखी रॉबिन' के बाद रॉबिन बनर्जी को कई फिल्में मिलीं, जैसे 'फ्लाइंग सर्कस' और 'मार्वल मैन'। एक दिन, योगेश एक महत्वपूर्ण मीटिंग में थे, जिसमें कई बड़े लोग मौजूद थे। अचानक रॉबिन ने योगेश से कहा, "योगेश, जरा एक गिलास पानी ले आ।"
योगेश को यह बात बुरी लगी। उन्होंने सोचा कि इतने बड़े लोगों के बीच उन्हें इस तरह से बुलाना उचित नहीं था। उन्होंने बिना कुछ कहे वहां से उठकर घर चले गए। कुछ दिनों बाद, रॉबिन ने उनसे पूछा, "तू कहां चला गया?" योगेश ने स्पष्ट किया कि वह पानी लाने के लिए नहीं हैं। रॉबिन ने माफी मांगी, लेकिन योगेश ने कहा कि सार्वजनिक स्थान पर अपमान सहन नहीं किया जा सकता।
इस घटना के बाद योगेश और रॉबिन के रिश्ते में खटास आ गई, लेकिन बाद में सब सामान्य हो गया। योगेश ने हृषिकेश मुखर्जी और बसु चटर्जी जैसे दिग्गजों के साथ काम किया और 'आनंद', 'रजनीगंधा', 'छोटी सी बात' जैसी फिल्मों में क्लासिक गाने दिए।
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