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भारती सिंह और शेखर सुमन को मिली बड़ी राहत, कोर्ट ने रद्द की एफआईआर!

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कॉमेडियन भारती सिंह और अभिनेता शेखर सुमन को बड़ी राहत देते हुए 2010 में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि हास्य और व्यंग्य के लिए की गई टिप्पणियों का उद्देश्य किसी समुदाय की भावनाओं को आहत करना नहीं होता। जानें इस मामले में कोर्ट ने क्या कहा और इसके पीछे की पूरी कहानी।
 
भारती सिंह और शेखर सुमन को मिली बड़ी राहत, कोर्ट ने रद्द की एफआईआर!

कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय




मुंबई, 1 मई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को कॉमेडियन भारती सिंह और अभिनेता शेखर सुमन को एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान करते हुए 2010 में दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि हास्य और व्यंग्य के उद्देश्य से की गई टिप्पणियों का मकसद किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं होता।


कोर्ट ने कहा कि जिन शब्दों को आपत्तिजनक माना जा रहा है, जैसे “या अल्लाह! रसगुल्ला! दही भल्ला!”, वे केवल तुकबंदी और हास्य के लिए उपयोग किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ये शब्द सामान्य खाद्य पदार्थ हैं, जिन्हें सभी समुदायों के लोग जानते और खाते हैं, और इनमें कोई धार्मिक संदर्भ नहीं है।


न्यायालय ने यह भी माना कि कलाकारों को निशाना बनाना आसान हो गया है, लेकिन आपराधिक कानून का दुरुपयोग करना गलत है। उन्होंने कहा कि यह शो एक पारिवारिक मनोरंजन कार्यक्रम के रूप में प्रसारित होता था और लंबे समय से चल रहा था। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐसे कार्यक्रमों में कलाकारों और जजों का उद्देश्य हंसी पैदा करना होता है।


कोर्ट ने आगे कहा कि वर्तमान परिस्थितियां मामले के निपटारे के लिए प्रासंगिक हैं। मंच पर प्रदर्शन करने वाले कलाकार अक्सर निर्धारित स्क्रिप्ट के अनुसार ही अभिनय करते हैं। उपलब्ध साक्ष्यों से यह स्पष्ट नहीं होता कि जजों ने उन संवादों को लिखा था। न्यायालय ने अभियोजन के उस तर्क को स्वीकार नहीं किया जिसमें ठोस आधार का अभाव था। जब शिकायत में आवश्यक तथ्यों की कमी हो और अपराध की पुष्टि न हो, तो ऐसी स्थिति में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।


कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 295-ए और धारा 34 के तहत पायधोनी पुलिस स्टेशन में 27 नवंबर 2010 को दर्ज की गई एफआईआर और उससे संबंधित सभी कार्यवाही को रद्द किया जाता है।


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