पूजा चोपड़ा की मां ने साझा की संघर्ष की कहानी: कैसे बदली उनकी जिंदगी?
पूजा चोपड़ा के जन्म के बाद का कठिन सफर
मुंबई, 20 जून। मिस इंडिया 2009 और अभिनेत्री पूजा चोपड़ा की मां ने अपनी बेटी के जन्म के बाद के कठिन समय की कहानी साझा की है।
रियलिटी शो 'तुम हो ना - घर की सुपरस्टार' में एक भावनात्मक बातचीत के दौरान, पूजा की मां नीरा ने मेज़बान राजीव खंडेलवाल से बताया कि कैसे उन्होंने सभी चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी दो बेटियों की परवरिश की। यह सफर तब तक कठिन रहा जब तक बेटियों को सफलता नहीं मिली।
नीरा ने शादी के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा, "शादी के समय हमारा परिवार मध्यम वर्ग का था। पहली बेटी के जन्म के बाद सब कुछ ठीक था, लेकिन जब वह डेढ़ साल की हुई, तब सास को कैंसर हो गया। मैंने उनसे कहा, 'मम्मी सब ठीक हो जाएगा ना?' तो उन्होंने कहा, 'अगर तुम्हारा बेटा होता तो सब कुछ बेहतर होता।'"
कई सालों बाद जब पूजा चोपड़ा का जन्म हुआ, नीरा ने बताया कि कैसे उस समय ने उनके जीवन को बदल दिया। उन्होंने कहा, "जब मेरी बड़ी बेटी सात साल की हुई, तब पूजा का जन्म हुआ और उस समय का माहौल बहुत खराब था। अस्पताल में तीन दिन तक कोई देखने नहीं आया और मेरे पास कपड़े भी नहीं थे।"
नीरा ने बताया कि उनके पति ने उन्हें लेने के लिए दस दिन बाद आए, लेकिन कोई खुशी नहीं थी। उन्होंने कहा, "ग्यारहवें दिन से काम शुरू कर दिया।"
सबसे भावुक क्षण तब आया जब नीरा ने बताया कि उन्हें अपने बच्चे के जन्म के बाद कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, "जब 20 दिन हो गए, तो मुझसे कहा गया कि इसे खत्म कर दो या अनाथालय में छोड़ दो। मैं मां हूं, ऐसा कैसे कर सकती हूं?"
अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित होकर, नीरा ने एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने कहा, "मैं 21 दिन की बच्ची के साथ घर से निकल गई।"
नीरा ने अपने पर्स में केवल 81 रुपये और दो बेटियों के साथ मुंबई पहुंचने की कहानी साझा की। उन्होंने कहा, "जब मैं कोलकाता से मुंबई आई, मेरे माता-पिता यहीं थे। मैंने बिना टिकट के यात्रा की।"
कठिन दिनों को याद करते हुए, नीरा ने बताया कि कैसे उन्होंने नौकरी की तलाश में एक पांच सितारा होटल में गईं। उन्होंने कहा, "मैं बहुत हताश थी और सीधे जाकर बोला, 'मैम, मुझे नौकरी चाहिए।'"
नीरा ने एक असामान्य टेस्ट का भी जिक्र किया, जिसमें उनसे पूछा गया, "मेरे केबिन में क्या खराब है?" उन्होंने ईमानदारी से जवाब दिया, जिससे उन्हें नौकरी मिल गई।
नीरा ने कहा, "उस समय मेरी सैलरी 900 रुपये थी। मैंने मां से कहा, 'मैं पूरा पैसा दे दूंगी, बस बच्चों के दूध के लिए थोड़ा रखूंगी।'"
सालों की मेहनत ने अंततः उनकी जिंदगी बदल दी। उन्होंने कहा, "मैंने छह साल इसी तरह निकाले और फिर गोवा में नौकरी मिली।"
अपनी बेटियों के बारे में बात करते हुए नीरा की आवाज गर्व से भर गई। उन्होंने कहा, "अगर जन्म बार-बार होते हैं, तो मैं ऊपर वाले से यही कहूंगी कि मुझे ये दोनों बेटियां वापस दें।"
घर छोड़ने के दिन को याद करते हुए नीरा ने कहा, "मैंने पलटकर देखा और कहा, 'आप मेरी बेटी को निकाल रहे हो, एक दिन यह मुझे गर्वित करेगी।' आज मेरी बेटी ने मुझे गर्व महसूस कराया।"
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