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पंडित जसराज: भारतीय संगीत के अनमोल रत्न की कहानी

पंडित जसराज, भारतीय संगीत के एक महानायक, का जन्म 28 जनवरी 1930 को हुआ था। उनके जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने संगीत के प्रति अपनी निष्ठा को कभी नहीं छोड़ा। उनके गायन में भाव और भक्ति का अद्भुत संगम था, जिसने उन्हें एक अद्वितीय पहचान दी। पंडित जसराज ने भारतीय सिनेमा में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा और कई नवाचार किए। उनके योगदान को भारत सरकार ने कई पुरस्कारों से सम्मानित किया। जानें उनके जीवन की अनकही कहानियाँ और उनकी विरासत के बारे में।
 

पंडित जसराज का प्रारंभिक जीवन


पंडित जसराज का जन्म 28 जनवरी 1930 को हरियाणा के पीली मंदोरी गांव में हुआ। उनका परिवार संगीत के प्रति समर्पित था, लेकिन उनके जीवन में एक दुखद मोड़ आया जब उनके पिता, पंडित मोतीराम, का निधन 24 अप्रैल 1934 को हुआ। उस समय जसराज की उम्र केवल चार वर्ष थी।


अपने पिता के बिना, उन्होंने अपने बड़े भाइयों, पंडित मणिराम और पंडित प्रताप नारायण, के मार्गदर्शन में मेवाती घराने की गायकी का अभ्यास शुरू किया। उन्होंने अपनी कला को निखारने के लिए प्रतिदिन 14 घंटे रियाज किया, जिससे उनकी गायकी में 'भाव' और 'भक्ति' का अद्भुत संगम देखने को मिला।


संगीत में करियर की शुरुआत

जसराज ने अपने युवा दिनों में गुजरात के साणंद में महाराज जयवंत सिंह वाघेला से संगीत की शिक्षा ली। उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ 1952 में आया, जब उन्होंने काठमांडू में नेपाल के राजा त्रिभुवन बीर बिक्रम शाह के दरबार में अपना पहला गायन प्रस्तुत किया। उस दिन राजा ने उनकी प्रस्तुति से प्रभावित होकर उन्हें 5,000 स्वर्ण मुद्राएं देने की घोषणा की।


उनकी गायकी में एक जादुई आकर्षण था, जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता था।


संगीत में नवाचार और योगदान

पंडित जसराज ने संगीत में कई नवाचार किए, जैसे 'जसरंगी जुगलबंदी' और 'हवेली संगीत', जिसे उन्होंने वैश्विक मंचों पर प्रस्तुत किया। उनकी गायकी में 'कण-गायकी' और 'मींड' का उपयोग शास्त्रीय संगीत को और भी सुरीला और भावपूर्ण बनाता था।


उन्होंने भारतीय सिनेमा में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा, जिसमें 'लड़की सह्याद्रि की' और 'बीरबल माय ब्रदर' जैसी फिल्मों में उनके गाने शामिल हैं।


सम्मान और विरासत

पंडित जसराज को भारत सरकार द्वारा पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे सम्मान मिले। 2006 में, अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ ने उनके सम्मान में एक क्षुद्रग्रह का नाम 'पंडित जसराज' रखा।


उन्होंने अपने पिता और भाई की याद में 'पंडित मोतीराम पंडित मणिराम संगीत समारोह' की स्थापना की। 17 अगस्त 2020 को उनका निधन न्यू जर्सी, अमेरिका में हुआ, और उनका अंतिम संस्कार मुंबई में राजकीय सम्मान के साथ किया गया।


पंडित जसराज कल्चरल फाउंडेशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी 92वीं जयंती पर 'पंडित जसराज कल्चरल फाउंडेशन' की स्थापना की, जिसका उद्देश्य उनकी विरासत को सहेजना और भारतीय संगीत को वैश्विक स्तर पर फैलाना है।


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