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पंकज त्रिपाठी का हथकरघा उद्योग को बचाने का प्रयास: जानें क्यों है यह महत्वपूर्ण?

पंकज त्रिपाठी ने हाल ही में अपने नए हथकरघा उद्यम की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा को संरक्षित करना है। उन्होंने बताया कि कैसे शूटिंग के दौरान उन्हें इस उद्योग की खूबसूरती का अनुभव हुआ और उन्होंने स्थानीय कलाकारों को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। जानें उनके अनुभव और इस अनूठी परंपरा के महत्व के बारे में।
 
पंकज त्रिपाठी का हथकरघा उद्योग को बचाने का प्रयास: जानें क्यों है यह महत्वपूर्ण?

पंकज त्रिपाठी का हथकरघा उद्योग के प्रति समर्पण


मुंबई, 17 जून। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने हाल ही में बताया कि शूटिंग के दौरान यात्रा करते समय उन्हें हथकरघा की अद्भुतता का अनुभव हुआ। उनके अनुसार, हथकरघा केवल आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि यह एक पुरानी परंपरा है जो पीढ़ियों से चली आ रही है।


अभिनेता ने अपने नए हथकरघा उद्यम की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य भारत की हथकरघा परंपरा को संरक्षित करना, स्थानीय कलाकारों को सशक्त बनाना और उपभोक्ताओं को स्थानीय उत्पादों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।


पंकज ने कहा कि वर्षों तक शूटिंग के दौरान उन्हें हथकरघा उद्योग की समृद्ध परंपरा से अवगत होने का अवसर मिला। चंदेरी में शूटिंग के दौरान, उन्होंने देखा कि हर महिला ने हाथ से बने साड़ी पहने हुए थीं, जो उनके लिए एक अद्भुत अनुभव था।


उन्होंने साझा किया, "जब भी मैं बनारस जाता हूं, तो मैं वहां के कलाकारों को देखता हूं, जो हाथ से बने कपड़े पहनते हैं। यह एक जादुई अनुभव है। आज के मशीन युग में, लोग हाथ से बने कपड़ों को प्राथमिकता दे रहे हैं, यह जानकर मुझे खुशी होती है।"


पंकज ने कहा कि यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत के अलावा, इस तरह की परंपरा कहीं और जीवित नहीं है। भारत में विविधता है, और जितना अधिक वह खोजते हैं, उतना ही अधिक सीखते हैं।


उन्होंने बताया कि हथकरघा केवल कपड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कहानियों, संस्कृति, धैर्य और मानव ज्ञान से भी जुड़ा है। हर बुनाई अपने क्षेत्र की पहचान को दर्शाती है।


अभिनेता ने चिंता व्यक्त की कि आज कई बुनकरों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन वे इस अनूठी परंपरा को बचाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह हथकरघा और बुनाई के प्रति जागरूकता बढ़ा सकें, तो उन्हें खुशी मिलेगी।


पंकज ने खादी और हथकरघा उत्पादों के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह स्टाइलिस्ट विनीत चौहान के सहयोग से भारतीय शिल्प कौशल को बढ़ावा देना चाहते हैं।


उन्होंने कहा कि उनके उद्यम का उद्देश्य न केवल खूबसूरत हथकरघा उत्पादों को प्रदर्शित करना है, बल्कि उनके पीछे की कहानियों को भी उजागर करना है।


अभिनेता ने कहा, "हमारा सपना है कि हम भारत के विभिन्न कारीगर समुदायों के साथ मिलकर काम करें और उनके अद्वितीय काम को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाएं।"


पंकज ने अंत में कहा, "भारत की हथकरघा परंपरा हजारों साल पुरानी है और यह हमारी सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है।"


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