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दीया मिर्जा ने जलवायु परिवर्तन पर अपने बयान को लेकर दी सफाई, जानें क्या कहा?

अभिनेत्री दीया मिर्जा ने हाल ही में जलवायु परिवर्तन पर अपने बयान को लेकर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराना नहीं था, बल्कि पितृसत्तात्मक व्यवस्थाओं की ओर ध्यान आकर्षित करना था। उनके बयान ने सोशल मीडिया पर बहस को जन्म दिया, जिसके बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरण का संकट नहीं है, बल्कि यह असमानता का भी संकट है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और दीया का दृष्टिकोण।
 
दीया मिर्जा ने जलवायु परिवर्तन पर अपने बयान को लेकर दी सफाई, जानें क्या कहा?

दीया मिर्जा का विवादित बयान




मुंबई, 16 जून। पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री दीया मिर्जा हाल ही में अपने एक बयान के कारण चर्चा में हैं। उन्होंने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संकट पर बात करते हुए पुरुषों के प्रति एक टिप्पणी की, जिसने सोशल मीडिया पर बहस को जन्म दिया। इस विवाद के बीच, दीया ने स्पष्ट किया कि उनकी बात को गलत समझा गया है और उनका उद्देश्य किसी विशेष व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं था, बल्कि वह व्यवस्थाओं की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहती थीं।


यह विवाद तब शुरू हुआ जब दीया ने सोहा अली खान के पॉडकास्ट 'ऑल अबाउट हर' में कहा कि पितृसत्ता जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि पुरुषों ने इसे बढ़ावा दिया है और आज की समस्याओं के लिए वे पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। इस बयान के बाद, कई लोगों ने सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना की और इसे सभी पुरुषों पर आरोप लगाने के रूप में देखा।


विवाद बढ़ने पर, दीया ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा किया जिसमें उन्होंने कहा, 'इस विषय पर चर्चा हो रही है, इसलिए इसे स्पष्ट करना आवश्यक है। मैं अपने बयान पर कायम हूं कि पितृसत्तात्मक व्यवस्था ने जलवायु संकट को जन्म दिया है। जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरण का संकट नहीं है, बल्कि यह असमानता का भी संकट है।' उन्होंने यह भी कहा कि पितृसत्तात्मक व्यवस्थाओं ने संसाधनों के दोहन को प्राथमिकता दी है।


दीया ने आगे कहा, 'जैसे पितृसत्तात्मक समाजों में महिलाओं और लड़कियों के साथ व्यवहार किया जाता है, उसी तरह से प्राकृतिक संसाधनों को भी एक वस्तु के रूप में देखा गया है। यह सोच अब स्पष्ट हो चुकी है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।'


उन्होंने कहा, 'इस एपिसोड में मैंने और आरती कुमार राव ने समझाया कि यह शोषणकारी व्यवस्था किस तरह जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा देती है। यह व्यवस्थाएं आज भी प्रकृति संरक्षण और महिलाओं के अधिकारों की आवाज उठाने वालों को कमजोर करने में लगी हुई हैं।'


दीया ने यह भी बताया कि महिलाएं और लड़कियां, विशेषकर कमजोर समुदायों में, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सबसे पहले सामना करती हैं। पानी की कमी और भोजन की असुरक्षा जैसी समस्याएं उनके जीवन को प्रभावित करती हैं। इसके बावजूद, पर्यावरण से जुड़े निर्णय लेने वाले मंचों पर उनकी भागीदारी बहुत कम है।


उन्होंने कहा, 'जब हम जलवायु परिवर्तन पर बात करते हैं, तो हमें न्याय की भी बात करनी चाहिए। हमें उन व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने होंगे जो संसाधनों के अत्यधिक उपभोग को बढ़ावा देती हैं।'


अंत में, दीया ने लिखा, 'जलवायु संकट केवल कार्बन उत्सर्जन का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह इस बात से भी संबंधित है कि हम एक-दूसरे और प्रकृति के साथ किस तरह का संबंध बनाते हैं। हमें एक टिकाऊ भविष्य के लिए समानता और करुणा पर आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ना होगा।'


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