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क्या है सामंथा रुथ प्रभु का अनोखा 'भूत शुद्धि विवाह'? जानें इस अद्भुत परंपरा के बारे में!

सामंथा रुथ प्रभु और राज निदिमोरू ने कोयंबटूर के ईशा योग केंद्र में भूत शुद्धि विवाह की अनोखी परंपरा के तहत शादी की। इस प्रक्रिया में पांच तत्वों को शुद्ध किया जाता है, जिससे दांपत्य जीवन में गहराई और स्थिरता आती है। जानें इस अद्भुत परंपरा के बारे में और कैसे यह दांपत्य जीवन को समृद्ध बनाती है।
 
क्या है सामंथा रुथ प्रभु का अनोखा 'भूत शुद्धि विवाह'? जानें इस अद्भुत परंपरा के बारे में!

सामंथा रुथ प्रभु और राज निदिमोरू का विवाह


अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु और फिल्म निर्देशक राज निदिमोरू ने सोमवार सुबह कोयंबटूर के ईशा योग केंद्र में लिंग भैरवी को साक्षी मानकर विवाह किया। यह विवाह 'भूत शुद्धि विवाह' की प्राचीन योग परंपरा के अनुसार संपन्न हुआ। इस खास अवसर पर केवल कुछ करीबी मित्र और परिवार के सदस्य ही उपस्थित थे। यदि आपने 'भूत शुद्धि विवाह' के बारे में पहले नहीं सुना है, तो आइए हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।


भूत शुद्धि विवाह की प्रक्रिया

यह एक विशेष प्रक्रिया है, जो दांपत्य जीवन में पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) को शुद्ध करती है, जिससे एक गहरा और स्थायी संबंध बनता है। यह संबंध केवल विचारों, भावनाओं और शारीरिक जुड़ाव से कहीं अधिक होता है। लिंग भैरवी या अन्य विशेष स्थानों पर किया जाने वाला 'भूत शुद्धि विवाह' दांपत्य जीवन के भीतर के पांच तत्वों को शुद्ध करता है, जिससे उनके रिश्ते की मजबूती और पवित्रता बढ़ती है। यह प्रक्रिया दांपत्य जीवन में देवी का आशीर्वाद, खुशी, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक संतुलन सुनिश्चित करने के लिए की जाती है। सामंथा और राज के विवाह के बाद, ईशा फाउंडेशन ने उन्हें दिल से बधाई दी और प्रार्थना की कि देवी की कृपा उनके दांपत्य जीवन में बनी रहे।


लिंग भैरवी का महत्व

लिंग भैरवी का महत्व


लिंग भैरवी एक दिव्य स्त्री का उग्र और दयालु रूप है, जिसे सद्गुरु ने ईशा योग केंद्र में प्राण प्रतिष्ठा के माध्यम से स्थापित किया। यहाँ ऐसे रीति-रिवाज़ हैं जो जीवन को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। यह आठ फुट का ऊर्जा रूप, जो ब्रह्मांड की रचनात्मक शक्ति का प्रतीक है, जन्म से लेकर मृत्यु तक, जीवन के हर चरण में भक्तों का साथ देता है। यह शरीर, मन और ऊर्जा को संतुलित करने में मदद करता है।


सद्गुरु का संदेश

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु का कहना है कि आने वाली पीढ़ियों का जीवन विवाह के पवित्र बंधन पर निर्भर करता है। दांपत्य जीवन में खुश रहने के लिए यह आवश्यक है कि विवाह की प्रक्रिया पूरी पवित्रता और गरिमा के साथ संपन्न हो। 'भूत शुद्धि विवाह' ऐसी ही एक प्रक्रिया है, जो दांपत्य जीवन को मजबूत बनाने के लिए पांच तत्वों को शुद्ध करती है। इस प्रक्रिया से जितना अधिक शुद्धिकरण किया जाता है, उतना ही जीवन की गुणवत्ता और दिशा निर्धारित होती है। इससे न केवल दूल्हा-दुल्हन, बल्कि विवाह में शामिल हर व्यक्ति को लाभ मिलता है।


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