क्या बॉलीवुड सितारे बनेंगे वीगन? मेनका गांधी ने उठाया बड़ा मुद्दा!
मेनका गांधी की 'सिनेकाइंड' पहल
मुंबई, 11 सितंबर। पूर्व केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकारों की समर्थक मेनका गांधी ने सिनेमा में जानवरों के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए 'सिनेकाइंड' नामक एक नई पहल शुरू की है। उनका मानना है कि भारतीय फिल्म उद्योग के सभी सितारों को वीगन बनने की सलाह दी जानी चाहिए, खासकर वे जो जानवरों के अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं।
मेनका गांधी ने कहा कि जो अभिनेता जानवरों के अधिकारों की बात करते हैं, उन्हें खुद भी वीगन बनना चाहिए। उन्होंने कहा, "अभिनेताओं को अपने विचारों के प्रति सच्चे रहना चाहिए और इसके लिए खड़ा होना चाहिए।"
जब उनसे पूछा गया कि क्या फिल्म इंडस्ट्री जानवरों के प्रति सच में संवेदनशील है, तो उन्होंने कहा, "आप जिस विषय की बात कर रहे हैं, वह 1960, 70 और 80 के दशक में होती थी। इसके बाद, हमने एक कानून बनाया, जिसके तहत जो भी इस तरह की प्रथाओं में शामिल होता है, उसे एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के सामने पेश होना पड़ता है।"
उन्होंने आगे बताया, "यह प्रक्रिया 2000 में शुरू हुई और उसके बाद फिल्म इंडस्ट्री ने अपने भीतर कई सुधार किए हैं। अब बहुत कम फिल्में हैं जो जानवरों पर अत्याचार दिखाती हैं। आजकल, जब आप कोई फिल्म देखते हैं, तो यह बताया जाता है कि 'इस फिल्म की शूटिंग के दौरान किसी जानवर को चोट नहीं आई।' इसके अलावा, पक्षियों को पिंजरे में रखना और जानवरों को ऊंचाई से फेंकने जैसे गैर-कानूनी कार्य अब समाप्त हो चुके हैं।"
मेनका गांधी ने यह भी कहा कि अब कोई फिल्म इन कानूनों का उल्लंघन नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, "सेंसर बोर्ड भी इस मामले में बहुत सतर्क हो गया है। फिर भी, कुछ फिल्में ऐसी हैं जो किसी तरह बच जाती हैं, जहां जानवरों पर अत्याचार होता है। यह स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने अपनी बात को समाप्त करते हुए कहा, "फिल्में लोगों के दृष्टिकोण को प्रभावित करती हैं। जब लोग बड़े सितारों को पक्षियों को पिंजरे में बंद करते हुए देखते हैं, तो वे भी ऐसा करने लगते हैं। इसलिए हमें इस पर ध्यान देना चाहिए।"
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