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के. एस. चित्रा: संगीत की दुनिया की रानी, जो बनना चाहती थीं शिक्षिका

के. एस. चित्रा, जो एक संगीत शिक्षिका बनना चाहती थीं, आज भारत की सबसे प्रतिष्ठित गायिकाओं में से एक हैं। उनके चार दशकों के करियर में उन्होंने हजारों गाने गाए और कई पुरस्कार जीते। जानें उनकी अद्भुत यात्रा, उपलब्धियों और संगीत के प्रति उनके समर्पण के बारे में।
 

संगीत की अद्भुत यात्रा




मुंबई, 26 जुलाई। प्रसिद्ध गायिका के. एस. चित्रा ने अपने चार दशकों से अधिक के करियर में न केवल बेहतरीन गाने गाए हैं, बल्कि अपने सरल स्वभाव से भी लोगों का दिल जीता है। चित्रा का सपना कभी गायिका बनने का नहीं था, बल्कि वह एक संगीत शिक्षिका बनना चाहती थीं। लेकिन किस्मत ने उन्हें एक ऐसा मार्ग दिखाया कि वह भारत की सबसे प्रतिष्ठित गायिकाओं में शामिल हो गईं।


के. एस. चित्रा का जन्म 27 जुलाई 1963 को केरल के तिरुवनंतपुरम में हुआ। उनके पिता, कृष्णन नायर, एक स्कूल शिक्षक और संगीत प्रेमी थे, जबकि उनकी मां, शांताकुमारी, भी संगीत शिक्षिका थीं। घर में संगीत का माहौल होने के कारण चित्रा की आवाज की विशेषता को उनके पिता ने जल्दी ही पहचान लिया और उन्हें संगीत सीखने के लिए प्रेरित किया।


चित्रा ने तिरुवनंतपुरम के एक स्कूल से अपनी पढ़ाई की और बाद में संगीत में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। हालांकि, उनका लक्ष्य संगीत सिखाना था, लेकिन उनके शिक्षकों और परिवार ने उनकी आवाज को पहचाना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।


1978 से 1984 के बीच, उन्हें भारत सरकार की नेशनल टैलेंट सर्च स्कॉलरशिप मिली, जिसने उनके संगीत करियर को और मजबूती दी।


चित्रा को फिल्म उद्योग में पहला बड़ा अवसर मलयालम संगीतकार एम. जी. राधाकृष्णन ने दिया। 1979 में उनकी आवाज रिकॉर्ड की गई, और 1982 में फिल्म 'केलकथा शब्दम' से उनके प्लेबैक सिंगिंग करियर की शुरुआत हुई।


इसके बाद चित्रा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, हिंदी सहित कई भाषाओं में हजारों गाने गाए। उनकी आवाज को इतना पसंद किया गया कि उन्हें 'केरल की कोकिला' और 'लिटिल नाइटिंगेल ऑफ इंडिया' जैसे उपनाम मिले।


संगीत की दुनिया में चित्रा ने ए. आर. रहमान, इलैयाराजा, एम. एम. कीरवानी जैसे कई बड़े संगीतकारों के साथ काम किया। हिंदी सिनेमा में भी उनके कई लोकप्रिय गाने हैं, जैसे फिल्म 'बॉम्बे' का गाना 'कहना ही क्या'।


चित्रा की उपलब्धियों में छह नेशनल फिल्म अवॉर्ड शामिल हैं, साथ ही कई फिल्मफेयर अवॉर्ड, राज्य सरकारों के पुरस्कार और 2005 में पद्म श्री तथा 2021 में पद्म भूषण जैसे सम्मान भी शामिल हैं। 2001 में उन्होंने लंदन के प्रतिष्ठित रॉयल अल्बर्ट हॉल में भी प्रस्तुति दी।


इसके अलावा, चित्रा ने जरूरतमंद और रिटायर हो चुके संगीतकारों की सहायता के लिए 'स्नेहानंदना ट्रस्ट' की स्थापना की।


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