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आशा भोसले: एक सिंगर से एक भावुक अदाकारा तक का सफर

बॉलीवुड की दिग्गज गायिका आशा भोसले के निधन से उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। उन्होंने 12,000 से अधिक गाने गाए और अभिनय में भी अपनी छाप छोड़ी। उनकी पहली फिल्म 'माई' में निभाया गया मां का किरदार दर्शकों को भावुक कर गया। इस लेख में जानें कैसे आशा ताई ने अपने किरदार को जीवंत किया और अपनी व्यक्तिगत त्रासदियों का सामना किया।
 
आशा भोसले: एक सिंगर से एक भावुक अदाकारा तक का सफर

आशा भोसले का अद्भुत सफर


मुंबई, 12 अप्रैल। बॉलीवुड की मशहूर गायिका आशा भोसले के निधन से उनके प्रशंसकों में गहरा शोक है। उन्होंने विभिन्न भाषाओं में 12,000 से अधिक गाने गाए हैं, और उनकी आवाज़ का जादू विदेशों में भी छाया हुआ है। लेकिन बहुत से लोग नहीं जानते कि आशा ताई ने अभिनय के क्षेत्र में भी कदम रखा था।


उन्होंने एक ऐसा भावुक किरदार निभाया था कि दर्शक उनकी अदाकारी को देखकर रो पड़े।


गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में सबसे अधिक रिकॉर्डिंग करने वाली कलाकार के रूप में मान्यता प्राप्त आशा भोसले ने मराठी फिल्म 'माई' में एक मां का किरदार निभाया। इस फिल्म में वह एक ऐसी मां बनीं जो अल्जाइमर से ग्रसित है और अपनी याददाश्त खो चुकी है। फिल्म में उनका बेटा (राम कपूर) उन्हें वृद्धाश्रम छोड़ने का निर्णय लेता है, जबकि उनकी बेटी (पद्मिनी कोल्हापुरे) उनकी देखभाल करती है।


यह फिल्म जीवन के ताने-बाने और बुजुर्गों के प्रति बच्चों के बदलते दृष्टिकोण को दर्शाती है। आशा ताई के लिए यह फिल्म विशेष थी, क्योंकि यह उनकी पहली फिल्म थी और इसकी कहानी ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने गायकी के साथ-साथ अभिनय करने का निर्णय लिया।


उन्होंने 2013 में एक इंटरव्यू में कहा था कि 'माई' का किरदार उन्हें गहराई से छू गया था और यह उनके जीवन की वास्तविकता से काफी मेल खाता था। आशा जी ने फिल्म के किसी भी भावुक दृश्य में रोने के लिए ग्लिसरीन का सहारा नहीं लिया; उनकी आंखों में आंसू खुद-ब-खुद आ जाते थे।


उन्होंने कहा, 'मैं अपने किरदार में इतनी डूब जाती थी कि भावनाएं अपने आप बाहर आ जाती थीं।' फिल्म 'माई' से पहले, उनकी बेटी ने 2012 में आत्महत्या की थी, और इस दुख से उबरने से पहले ही 2015 में उनके बेटे का कैंसर से निधन हो गया।


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