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अमिताभ बच्चन ने साझा किया भाषा का अनोखा किस्सा, जानें कैसे बनते हैं नए शब्द!

अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग पर एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे आम लोग अंग्रेजी शब्दों को अपनी सुविधा के अनुसार बदलकर नए और रोचक शब्द बना लेते हैं। उन्होंने अपने प्रशंसकों के साथ जुड़ने के महत्व को भी बताया और भाषा की रचनात्मकता की सराहना की। जानें इस अनोखे किस्से के बारे में और बिग बी के विचारों को!
 
अमिताभ बच्चन ने साझा किया भाषा का अनोखा किस्सा, जानें कैसे बनते हैं नए शब्द!

अमिताभ बच्चन का दिलचस्प ब्लॉग पोस्ट




मुंबई, 15 जून। अभिनेता अमिताभ बच्चन अपने ब्लॉग पर अक्सर अपने प्रशंसकों के लिए मजेदार किस्से और जानकारी साझा करते हैं। हाल ही में, उन्होंने भाषा और बोलचाल से संबंधित एक दिलचस्प कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे आम लोग अंग्रेजी शब्दों को अपनी सुविधा के अनुसार बदलकर नए और रोचक शब्द बना लेते हैं।


बिग बी का मानना है कि ऐसे शब्द भाषा को और भी खूबसूरत बनाते हैं। उन्होंने अपने ब्लॉग की शुरुआत अपने फैंस को संबोधित करते हुए की और मजाक में कहा कि वह देर से उठे नहीं थे, बल्कि काम में व्यस्त होने के कारण ब्लॉग लिखने में थोड़ी देरी हुई। उन्होंने लिखा कि उनके लिए काम तब पूरा होता है जब वह अपने प्रशंसकों से जुड़ते हैं।


इसके बाद, उन्होंने अपने घर 'जलसा' में लगे बोगनविलिया पौधों का जिक्र करते हुए एक मजेदार किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि उनके माली को अंग्रेजी शब्द "शरबरी" का उच्चारण करने में कठिनाई होती थी, इसलिए उसने इसे "सरबरी" कहना शुरू कर दिया। अमिताभ ने कहा कि यह नया शब्द सुनने में इतना दिलचस्प लगता है कि कई बार यह मूल अंग्रेजी शब्द से भी अधिक आकर्षक हो जाता है।


बिग बी ने एक और उदाहरण दिया, जिसमें बताया कि कई लोग "रेडिएटर" शब्द का सही उच्चारण नहीं कर पाते। इसलिए, उन्होंने इसे अपने तरीके से "रेडी वॉटर" कहना शुरू कर दिया। लोगों का मानना था कि चूंकि रेडिएटर में पानी भरा जाता है, इसलिए इसका नाम "रेडी वॉटर" होना चाहिए। अमिताभ ने कहा कि भले ही यह शब्द तकनीकी रूप से सही न हो, लेकिन इसमें एक अलग तरह की रचनात्मकता और अपनापन दिखाई देता है।


उन्होंने आगे कहा कि ऐसे शब्दों का उच्चारण मूल शब्दों के काफी करीब होता है, लेकिन उनमें स्थानीय भाषा और संस्कृति की मिठास भी जुड़ जाती है। यही कारण है कि वे सुनने में और भी सुंदर लगते हैं।


अमिताभ बच्चन ने यह भी बताया कि भले ही हर व्यक्ति अंग्रेजी में पारंगत न हो, लेकिन लोग अपने अनुभव और समझ के आधार पर शब्दों को नया रूप दे देते हैं। यही रचनात्मकता भाषा को जीवंत बनाती है। उन्होंने अपने प्रशंसकों का आभार भी व्यक्त किया और कहा कि हर रविवार उनसे मिलने आने वाले फैंस उनके घर और जीवन को और अधिक सुंदर बना देते हैं।


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