Movie prime

सेलिना जेटली और उनके भाई के कानूनी विवाद का नया मोड़

सेलिना जेटली और उनके भाई विक्रांत जेटली के बीच चल रहा कानूनी विवाद अब एक नए मोड़ पर समाप्त हो गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सेलिना की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने भाई से मिलने की अनुमति मांगी थी। अदालत को बताया गया कि विक्रांत ने उनसे संपर्क करने से मना कर दिया है। इस मामले में आगे के कदम तब उठाए जाएंगे जब विक्रांत खुद इसमें शामिल होने की इच्छा व्यक्त करेगा। जानें इस विवाद के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
 
सेलिना जेटली और उनके भाई के कानूनी विवाद का नया मोड़

कानूनी विवाद का अंत

अभिनेत्री सेलिना जेटली और उनके भाई, रिटायर्ड मेजर विक्रांत जेटली के बीच चल रहा कानूनी विवाद अब एक नए मोड़ पर समाप्त हो गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को सेलिना की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने यूएई में हिरासत में लिए गए अपने भाई से मिलने की अनुमति मांगी थी। अदालत को बताया गया कि विक्रांत ने उनसे किसी भी प्रकार का संपर्क करने से मना कर दिया है।


भाई ने संपर्क से मना किया

अदालत ने यह रिकॉर्ड किया कि विक्रांत जेटली, जो यूएई में हिरासत में हैं, ने काउंसलर से बातचीत के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि वह अपनी बहन से बात नहीं करना चाहते। उन्होंने इस समय कानूनी प्रतिनिधित्व लेने से भी मना कर दिया है और कहा है कि भविष्य में इस मामले का निर्णय उनकी पत्नी लेंगी।


दूतावास की रिपोर्ट

भारतीय दूतावास द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट, जिसे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत में पेश किया, में विक्रांत जेटली के साथ हुई बातचीत का विवरण था। रिपोर्ट में यह पुष्टि की गई कि विक्रांत ने सेलिना से बात न करने की अपनी इच्छा को दोहराया।


कोर्ट के निर्देश

पिछले कुछ हफ्तों में इस मामले में अदालत ने कई निर्देश दिए थे। 17 फरवरी को, उच्च न्यायालय ने विदेश मंत्रालय को चार हफ्तों का समय दिया था ताकि वे विक्रांत जेटली से अबू धाबी में मुलाकात का इंतज़ाम कर सकें। यह निर्देश उनकी पत्नी द्वारा अदालत में एक नोट दाखिल करने के बाद आया।


कानूनी सहायता और पारिवारिक सहयोग

पिछली सुनवाई में, अदालत ने परिवार के सदस्यों, जिसमें सेलिना और चारुल जेटली शामिल थीं, से आग्रह किया कि वे विक्रांत की रिहाई के लिए मिलकर प्रयास करें। केंद्र सरकार ने उस लॉ फर्म को एक पत्र जारी किया था, जिसमें उसे कानूनी रूप से पेश होने के लिए कहा गया था।


MEA का रुख

केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि भारत और यूएई के बीच कानूनी सहायता के ढांचे के तहत, अदालतों के माध्यम से विदेशी नागरिकों के साथ मुलाकातों की सुविधा देने का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, सरकार ने यह संकेत दिया कि दूतावास के अधिकारी विक्रांत को कानूनी प्रतिनिधित्व के बारे में जानकारी दे सकते हैं, बशर्ते स्थानीय अधिकारियों से मंजूरी मिल जाए।


अगले कदम

चूंकि विक्रांत ने फिलहाल किसी भी प्रकार के संपर्क या कानूनी सहायता लेने से इनकार कर दिया है, इसलिए उच्च न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई समाप्त कर दी। अब इस मामले में आगे के कदम तभी उठाए जाएंगे, जब विक्रांत खुद इसमें शामिल होने की इच्छा व्यक्त करेगा।


OTT