सुधीर मिश्रा की एयरलाइन सेवा से नाराजगी: 'मेरे बैग में थीं दवाइयां और जरूरी सामान'
सुधीर मिश्रा का एयरलाइन अनुभव
मुंबई, 28 अक्टूबर। फिल्म निर्देशक सुधीर मिश्रा ने बुधवार को इंडिगो एयरलाइन की सेवा पर अपनी असंतोष व्यक्त की। वह दिल्ली से धर्मशाला की यात्रा कर रहे थे, लेकिन जब वह वहां पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि उनका सामान दिल्ली में ही रह गया है।
सुधीर ने कहा कि उनके बैग में सभी आवश्यक दवाइयां और अन्य जरूरी सामान थे। बाद में उन्हें सूचित किया गया कि उनका सामान चंडीगढ़ के रास्ते शाम तक पहुंच जाएगा। इस घटना से निराश होकर, उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी परेशानी साझा की और एयरलाइन की सेवा पर सवाल उठाए।
उन्होंने एक्स प्लेटफॉर्म पर लिखा, 'मैं कुछ दिनों के लिए धर्मशाला आया हूं। दिल्ली से इंडिगो की फ्लाइट से यहां पहुंचा। यहां आने पर मुझे बताया गया कि मेरा सामान दिल्ली में छूट गया है। अब मुझे बताया जा रहा है कि बुधवार शाम तक चंडीगढ़ के रास्ते मेरा सामान मुझ तक पहुंच जाएगा। मेरी सभी दवाइयां और जरूरी सामान उसी बैग में हैं।'
सुधीर ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा, 'यह बेहद निराशाजनक और परेशान करने वाला है।'
सुधीर मिश्रा हिंदी सिनेमा के एक प्रमुख फिल्म निर्माता हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1983 में कुंदन शाह की कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' से की थी, जहां उन्होंने सहायक निर्देशक और पटकथा लेखक के रूप में काम किया। इसके बाद उन्होंने सईद अख्तर मिर्जा की 'मोहन जोशी हाजिर हो!' और विधु विनोद चोपड़ा की 'खामोश' में भी योगदान दिया।
1987 में, उन्होंने फिल्म 'ये वो मंजिल तो नहीं' से निर्देशन की दुनिया में कदम रखा, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म के निर्देशक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। उनकी प्रमुख फिल्मों में 'मैं जिंदा हूं', 'धारावी', 'इस रात की सुबह नहीं', 'चमेली', 'हजारों ख्वाहिशें ऐसी', 'खोया खोया चांद', 'ये साली जिंदगी' और 'इंकार' शामिल हैं।
सुधीर ने राहुल भट्ट और ऋचा चड्ढा की फिल्म 'दास देव' का लेखन और निर्देशन भी किया। इसके बाद, उन्होंने इजरायली शो पर आधारित वेब सीरीज 'होस्टेजेस' का निर्देशन किया। उन्होंने मनु जोसेफ के पुरस्कार विजेता उपन्यास 'सीरियस मेन' पर आधारित फिल्म भी बनाई, जिसमें नवाजुद्दीन सिद्दीकी मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म में नवाजुद्दीन को इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स में नामांकन मिला था।
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