लीसा रे ने 50 की उम्र में बीच पर आत्म-स्वीकृति का नया अर्थ दिया!
लीसा रे की आत्म-स्वीकृति की कहानी
मुंबई, 4 फरवरी। फिल्म और फैशन की दुनिया में फिटनेस और लुक्स का बहुत महत्व है। इस क्षेत्र में काम करने वाली अभिनेत्रियों पर उम्र बढ़ने के साथ दबाव बढ़ता है। लेकिन कुछ अभिनेत्रियां, जैसे कि लीसा रे, ने इस दबाव को नकारते हुए अपनी शर्तों पर जीवन जीने का निर्णय लिया है। 50 वर्ष की उम्र में, उन्होंने 'बीच बॉडी' के विचार को आत्म-स्वीकृति, स्वतंत्रता और आत्म-सम्मान से जोड़ा है।
लीसा ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर समुद्र तट से अपनी कुछ तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों के कैप्शन में उन्होंने लिखा, ''एक समय था जब समुद्र तट पर सुंदर दिखने का मतलब एक निश्चित छवि से जुड़ा होता था, जैसे कि लाल स्विमसूट और लाल लिपस्टिक। 1991 में ग्लैडरैग्स के कवर ने मेरी इसी छवि को लोगों के मन में बसा दिया था, लेकिन अब मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि मैं खुद को कैसे देखती हूं।''
उन्होंने आगे कहा, ''मेरे शरीर में समय के साथ बदलाव आए हैं, मैंने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, बीमारियों से लड़ा हूं और खुद को फिर से खड़ा किया है। अब दूसरों की स्वीकृति से ज्यादा सुकून खुद को स्वीकार करने में है। उन असंभव सुंदरता के मानकों से बाहर निकलना ही मुझे असली राहत देता है।''
लीसा ने हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री पामेला एंडरसन का उदाहरण देते हुए कहा, ''पामेला कभी रेड स्विमसूट में दिखने वाली सबसे बड़ी फैंटेसी मानी जाती थीं, लेकिन आज वह उस छवि को तोड़कर अपनी पहचान खुद बना रही हैं।''
उन्होंने कहा, ''मुझे ग्लैमर या मेकअप से कोई समस्या नहीं है। शूट, रील्स और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए सजना-संवरना मजेदार लगता है। समुद्र तट मेरे लिए वह स्थान है, जहां मैं पूरी तरह से प्राकृतिक रहना चाहती हूं।''
लीसा ने यह भी बताया कि 1990 के दशक में सनस्क्रीन का उपयोग सामान्य नहीं था। उन्होंने कई बार धूप में झुलसने का अनुभव किया है, और आज उसकी छाप उनकी त्वचा पर है। लेकिन वह इसे अपनी कमजोरी नहीं मानतीं। यह सब उनके जीवन का हिस्सा है और वह इसके साथ पूरी तरह सहज हैं।
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