राहुल बोस: रग्बी से लेकर सिनेमा तक, एक बहुआयामी व्यक्तित्व
राहुल बोस का जीवन और करियर
नई दिल्ली, 26 जुलाई। 27 जुलाई 1967 को कोलकाता में जन्मे राहुल बोस केवल एक प्रतिभाशाली अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक पूर्व अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी, एक दूरदर्शी फिल्म निर्माता और एक समर्पित समाज सेवक भी हैं।
राहुल ने अपने बचपन में अपनी मां से बॉक्सिंग और रग्बी की शिक्षा ली। उन्होंने कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल और सिडेनहैम कॉलेज में पढ़ाई की। इस दौरान, उन्होंने पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान मंसूर अली खान पटौदी से क्रिकेट की ट्रेनिंग भी ली और बॉक्सिंग में रजत पदक जीता। रग्बी के प्रति उनका जुनून उन्हें 1998 से 2009 तक भारतीय राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बनाता है।
एक अभिनेता और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण था। 1994 से 2009 के बीच, उन्होंने अपनी 24 फिल्मों की शूटिंग को रग्बी कैलेंडर के अनुसार समायोजित किया।
राहुल ने 1998 से 2009 तक भारतीय राष्ट्रीय रग्बी टीम के लिए खेला। 2017 में, भारतीय महिला रग्बी टीम ने एशिया सेवेंस चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। 15 अगस्त 2021 को ओडिशा सरकार ने भारतीय रग्बी टीम की स्पॉन्सरशिप की घोषणा की। 18 दिसंबर 2021 को, राहुल ने रग्बी इंडिया के अध्यक्ष का पद संभाला।
राहुल का अभिनय का पहला अनुभव छह साल की उम्र में स्कूल के नाटक 'टॉम, द पाइपर्स सन' में हुआ। मां के निधन के बाद, उन्होंने रेडिफ्यूजन में कॉपीराइटर के रूप में काम किया और फिल्म इंग्लिश, ऑगस्ट (1994) की सफलता के बाद पूर्णकालिक अभिनेता बनने का निर्णय लिया।
उन्होंने हमेशा व्यावसायिक सिनेमा के बजाय समानांतर सिनेमा को प्राथमिकता दी। मिस्टर एंड मिसेज अय्यर, चमेली, झंकार बीट्स और विश्वरूपम जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की। उनकी पहली निर्देशित फिल्म एवरीबडी सेज आई एम फाइन! (2001) के लिए फंड जुटाने में उन्हें केवल 33 दिन लगे। इसके बाद, उन्होंने पूर्णा (2017) का निर्देशन किया, जो माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली सबसे कम उम्र की लड़की की बायोपिक थी।
सिनेमा और खेल के अलावा, राहुल एक सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। 2004 की सुनामी के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में राहत कार्यों ने उनके जीवन को नया उद्देश्य दिया। इसके परिणामस्वरूप, उन्होंने 'द फाउंडेशन' की स्थापना की, जिसका लक्ष्य समाज में भेदभाव को समाप्त करना है।
फाउंडेशन के 'प्रोजेक्ट रीच' के माध्यम से, वे दूरदराज के क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को देश के सर्वश्रेष्ठ स्कूलों में शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, उनके 'प्रोजेक्ट हील' ने बाल यौन शोषण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए 35,000 से अधिक शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों को प्रशिक्षित किया है।
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