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रकुल प्रीत की जिम वापसी: चोट से मिली नई सीख और मजबूत मानसिकता!

रकुल प्रीत ने हाल ही में जिम में वापसी की है, जहां उन्होंने अपनी चोट से उबरने के अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि इस कठिन समय ने उन्हें धैर्य और आभार का महत्व सिखाया। रकुल ने अपने नए दृष्टिकोण के साथ जिम में कदम रखा है, जो उनके लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक है। जानें उनकी यात्रा और मानसिकता में आए बदलाव के बारे में।
 

रकुल प्रीत की नई शुरुआत


मुंबई, 27 जुलाई। अभिनेत्री रकुल प्रीत ने जिम में वापसी की है और अपने नए लुक को साझा किया है। सोमवार को, उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर जिम सेशन की कई तस्वीरें पोस्ट कीं।


चोट से उबरने के बाद, रकुल ने जिम में कदम रखा और बताया कि इस अनुभव ने उन्हें सिखाया कि ठीक होने में समय लगता है और इसमें जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।


उन्होंने एक विस्तृत कैप्शन में अपनी चोट के बाद की स्थिति पर विचार साझा किया और बताया कि वह एक नई शुरुआत की ओर अग्रसर हैं।


उन्होंने लिखा, "हर यात्रा में एक ऐसा अध्याय होता है, जिसके लिए कोई योजना नहीं होती। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ, एक चोट के रूप में। एक पल मैं हर दिन मजबूत होने पर ध्यान केंद्रित कर रही थी, और अगले ही पल मुझे पूरी तरह से रुकना पड़ा। दर्द ही नहीं, बल्कि उस खामोशी से भी जूझना पड़ा जो मेरे जीवन के एक महत्वपूर्ण हिस्से से दूर होने पर आई।"


रकुल ने आगे कहा, "जिम केवल एक स्थान नहीं था, जहां मैंने खुद को प्रशिक्षित किया, बल्कि यह वह जगह थी, जहां मैंने अनुशासन सीखा, अपने मन को शांत किया और हर दिन खुद को याद दिलाया कि विकास निरंतरता से ही संभव है। सबसे कठिन बात मेरी प्रगति का रुकना नहीं था, बल्कि यह स्वीकार करना था कि ठीक होने में जल्दबाजी नहीं की जा सकती।"


अभिनेत्री ने बताया कि स्वास्थ्य की रिकवरी ने उन्हें ऐसे सबक सिखाए जो कोई भी व्यायाम नहीं सिखा सकता। इसने उन्हें धैर्य रखना सिखाया।


उन्होंने कहा, "इसने मुझे उन पलों के लिए आभार का अनुभव कराया, जिन्हें मैं पहले हल्के में लेती थी। ताकत हमेशा दिखावटी नहीं होती; कभी-कभी यह तब होती है जब आप खुद पर विश्वास रखते हैं, भले ही आपको तुरंत कोई प्रगति न दिखे। जैसे-जैसे दिन बीतते गए, मैंने खोई हुई चीजों पर ध्यान देना बंद कर दिया और जो मेरे पास था, उसकी सराहना करने लगी।"


उन्होंने आगे कहा, "हर छोटा कदम मुझे याद दिलाता रहा कि प्रगति कभी खत्म नहीं होती। आज जिम में वापस आना एक लंबी यात्रा के बाद घर लौटने जैसा लगता है। सब कुछ जाना-पहचाना सा लगता है, फिर भी मैं जानती हूं कि मैं वो इंसान नहीं हूं, जो डेढ़ साल पहले जिम से निकली थी।"


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