नाना पाटेकर: एक अद्वितीय अभिनेता का सफर, जिन्होंने सिनेमा में छोड़ी अमिट छाप
नाना पाटेकर का निधन
मुंबई, 8 अक्टूबर। हिंदी और मराठी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। अपने लगभग 50 साल के करियर में, नाना ने कई यादगार भूमिकाएँ निभाईं और कॉमेडी में भी अपनी विशेष पहचान बनाई। उनके संवाद बोलने का तरीका और किरदारों में भावनाओं को व्यक्त करने की क्षमता ने उन्हें अन्य कलाकारों से अलग बनाया।
नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था, और उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुद-जंजीरा में हुआ। उन्होंने मुंबई के सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से शिक्षा प्राप्त की और थिएटर से भी जुड़े रहे। 1978 में फिल्म 'गमन' से उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा, और अगले वर्ष मराठी फिल्म 'सिंहासन' में भी नजर आए।
1986 में, नाना का करियर एक नए मोड़ पर पहुंचा जब उन्होंने एन. चंद्रा की 'अंकुश' में काम किया। इस फिल्म में उन्होंने आम लोगों की समस्याओं और उनके भीतर के गुस्से को बखूबी दर्शाया। इसके बाद 'प्रतिघात', 'मोहरे', 'अंधा युद्ध' और 'सलाम बॉम्बे' जैसी फिल्मों ने उन्हें एक मजबूत अभिनेता के रूप में स्थापित किया।
1989 में विधु विनोद चोपड़ा की 'परिंदा' नाना की करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक बनी, जिसमें उन्होंने 'अन्ना' नामक खतरनाक अपराधी का किरदार निभाया। इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। 1990 के दशक में उन्होंने 'अग्निसाक्षी', 'खामोशी: द म्यूजिकल', 'राजू बन गया जेंटलमैन', 'अंगार', 'तिरंगा', 'गुलाम-ए-मुस्तफा', 'यशवंत' और 'कोहराम' जैसी फिल्मों में काम किया।
2004 में 'अब तक छप्पन' में नाना ने पुलिस अधिकारी साधु आगाशे की भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने 'टैक्सी नंबर 9211', 'वेलकम', 'राजनीति', 'द अटैक्स ऑफ 26/11' और 'काला' जैसी फिल्मों में भी विभिन्न प्रकार के किरदार निभाए।
हालांकि नाना की पहचान गंभीर भूमिकाओं के लिए रही, 2007 की 'वेलकम' ने उन्हें एक नए अंदाज में प्रस्तुत किया। इस फिल्म में उन्होंने उदय शेट्टी का किरदार निभाया और अपनी कॉमेडी टाइमिंग से दर्शकों को हंसाया। उदय शेट्टी आज भी हिंदी फिल्मों के यादगार कॉमिक किरदारों में से एक माने जाते हैं।
नाना का मराठी सिनेमा से भी गहरा संबंध रहा। उन्होंने 'पक पक पकाक', 'देऊल', 'नटसम्राट', 'आपला मानस', 'डॉ. प्रकाश बाबा आमटे: द रियल हीरो', 'यशवंतराव चव्हाण- बखर एका वादालाची' और 'ओले आले' जैसी फिल्मों में काम किया।
अभिनय के अलावा, नाना ने निर्देशन में भी हाथ आजमाया। 1991 में उन्होंने 'प्रहार: द फाइनल अटैक' का निर्देशन किया, जो भारतीय सेना और एक अनुशासित कमांडो की कहानी पर आधारित थी। कला और सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें 2013 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
सिनेमा के अलावा, नाना पाटेकर सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे। उन्होंने महाराष्ट्र में किसानों और सूखे से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए कई प्रयास किए। उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को हमेशा मीडिया की चकाचौंध से दूर रखा।
रिपोर्टों के अनुसार, नाना पाटेकर को गुरुवार सुबह गोवा के डोना पाउला स्थित उनके निवास पर कार्डियक अरेस्ट आया। उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए लगातार सीपीआर देने का प्रयास किया, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो सका और उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
.png)